सफल वक्ता एवं वाक्-प्रवीण कैसे बने

Author:

Surender Dogra Nirdosh

Publisher:

V & S Publisher

Rs115 Rs195 41% OFF

Availability: Available

Publisher

V & S Publisher

Publication Year 2013
ISBN-13

9789381448588

ISBN-10 9381448582
Binding

Paper Back

Edition FIRST
Number of Pages 133 Pages
Language (Hindi)
Dimensions (Cms) 21x14x0.5
Weight (grms) 144

आज की समूची व्यवस्था अर्थ प्रधान हो गई है।  इसीलिए व्यक्ति के गुण और व्यवहार भी उसी दृस्टि से जाँच-परखे जाते है।  वाक्-कला में  भी अब प्रोफेशनलिज्म को महत्व दिया जाने लगा है। प्रतिदिन के सामाजिक संबंधो के अतिरिक्त बिज़नेस मैनेजमेंट, प्रशासन, उद्योग-व्यापार, मार्केटिंग प्रोफेस्शन, राजनीती, जन-संपर्क, सत्र-समारोह, सेमिनार, संगोष्ठी हो या मीटिंग, अपनी बात को नपे-तुले, ठोस एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करना अनिवार्य हो गया है।  अपनी बात को मनवाने में आप जितने भी सक्ष्म होंगे, उतने ही सफल वक्ता कहलाएंगे।  वर्तमान परिवेश में ऐसे ही वक्ता की तलाश बनी रहती है। 


आज दुनिया के शिखर वक्ताओ में विवकानंद, ओशो, टैगोर, अटलबिहारी वाजपेयी, चर्चिल, केनेडी, टाटा, देशबंधु, फोर्ड जैसे महान लोगो की गिनती होती है। इनका नाम इतना बड़ा इसलिए हुआ कि इनके पास ज्ञान का अपार भंडार  तो रहा ही, अपनी बात को कहने का सारगर्भित और आकर्षक ढंग भी रहा। तभी तो लाखो लोग इनके दीवाने बन गए। 


चर्चित युवा लेखक सुरेंद्र डोगरा निर्दोष ने यह पुस्तक सफल वक्ता एवं वाक्-प्रवीण कैसे बने बहुत परिश्रम से लिखी है।  इसमें उन्होंने वाक्-कला की तमाम तकनीक, विधि और प्रयोग को बड़े ही रोचक और व्यवहारिक ढंग से समझाया है।  आशा है, आप इन्हे सीखकर निश्च्य ही एक दिन सफल वक्ता बन जाएंगे।

Surender Dogra Nirdosh

सुरेंद्र डोंगरा निर्दोष देश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में पिछले दो दशकों से रोचक, मनोरंजन तथा विभिन्न जानकारियों से पूर्ण रचनाएं लिख रहे है। आकाशवाणी के शिमला, धर्मशाला एवं दमन के केन्द्रो से भी उनकी वार्ताए निरंतर प्रसारित होती रहती है। सृजनात्मक लेखक-सीखने वाली रचनाओं और पुस्तकों के लेखन में भी उनकी गहरी रूचि है।
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