निराशा छोडो सुख से जिओ

Author:

Harendra Harsh

Publisher:

V & S Publisher

Rs115 Rs195 41% OFF

Availability: Available

Publisher

V & S Publisher

Publication Year 2014
ISBN-13

9789381448632

ISBN-10 9381448639
Binding

Paper Back

Edition FIRST
Number of Pages 136 Pages
Language (Hindi)
Dimensions (Cms) 21x14x0.5
Weight (grms) 134

आज का जीवन इतना जटिल और दुरूह हो गया है कि अचानक विपत्तियां अथवा अवरोध उठ खड़े होने पर लोगों का आत्मविश्वास डगमगा जाता है और वे आशा छोड़ देते हैं। निराशा से जीवन के बहुमूल्य तत्व नष्ट होने के कारण विजय के बहुत-से अवसर खो जाते हैं। आप निराश रहेंगे, तो हर चीज़ में बुराई ही नज़र आएगी। ऐसा व्यक्ति चिंता से अधमरा हो जाता है। अतः आशा की डोर कभी मत छोड़ो। उसके साथ डटे रहो, फि़र देखो, खुशियां आपके जीवन में बहारें ले आएंगी। 


आशा उत्साह की जननी है। आशा में तेज है, बल है, जीवन है। आशा ही समूचे संसार की संचालक शक्ति है। आशा मनुष्य के लिए अमृत है। जैसे सूर्य से पेड़-पौधों को जीवन प्राप्त होता है, वैसे ही आशा से मनुष्यों में जीवन-शक्ति का संचार होता है। निराशा कभी भी आपकी उन्नति नहीं होने देती और सदा आपके लक्ष्य में बाधक सिद्ध होती है। मनुष्य की सम्पूर्ण उन्नति और सफलता बेहतर जीवन शैली से ही संभव है। इसलिए निराशा को कभी पास मत फटकने दो। 


जाने-माने लेखक हरेन्द्र ‘हर्ष’ की सुलझी हुई लेखनी द्वारा रचित यह पुस्तक निराशा छोड़ो, सुख से जिओ विश्व विख्यात लेखक स्वेट मार्डेन के विचार, चिंतन और लेखन शैली को आगे बढ़ाती है। यह पुस्तक अपने आप में अधिक व्यावहारिक एवं रोचक बन पड़ी है। इसमें दिए गए उदाहरण, उद्धरण और प्रसंग निराशा दूर भगाने में सक्षम हैं। सही मायनों में यह वर्तमान जीवन की ज्योतिर्मय मार्गदर्शिका है। 

Harendra Harsh

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