Azadi  (Pb)

Author:

Arundhati Roy

,

Reyazul Haque

Publisher:

Rajkamal Parkashan Pvt Ltd

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Availability: Available

Publisher

Rajkamal Parkashan Pvt Ltd

Publication Year 2020
ISBN-13

9789389598704

ISBN-10 9389598702
Binding

Paperback

Number of Pages 248 Pages
Language (Hindi)
Dimensions (Cms) 20 x 14 x 4
Weight (grms) 190
आज़ादी—कश्मीर में आज़ादी के संघर्ष का नारा है, जिससे कश्मीरी उस चीज़ की मुख़ालफ़त करते हैं जिसे वे भारतीय क़ब्ज़े के रूप में देखते हैं। विडम्बना ही है कि यह भारत की सड़कों पर हिन्दू राष्ट्रवाद की परियोजना की मुख़ालफ़त करनेवाले लाखों अवाम का नारा भी बन गया। आज़ादी की इन दोनों पुकारों के बीच क्या है–क्या यह एक दरार है या एक पुल है? इस सवाल के जवाब पर ग़ौर करने का वक़्त अभी आया ही था कि सड़कें ख़ामोश हो गईं। सिर्फ़ भारत ही नहीं, पूरी दुनिया की सड़कें। कोविड–19 के साथ आई आज़ादी की एक और समझ, जो कहीं ख़ौफ़नाक थी। इसने मुल्कों के बीच सरहदों को बेमानी बना दिया, सारी की सारी आबादियों को क़ैद कर दिया और आधुनिक दुनिया को इस तरह ठहराव पर ला दिया जैसा कभी नहीं देखा गया था। रोमांचित कर देनेवाले इन लेखों में अरुंधति रॉय एक चुनौती देती हैं कि हम दुनिया में बढ़ती जा रही तानाशाही के दौर में आज़ादी के मायनों पर ग़ौर करें। इन लेखों में, हमारे बेचैन कर देनेवाले इस वक़्त में निजी और सार्वजनिक ज़ुबानों पर बात की गई है, बात की गई है क़िस्सागोई और नए सपनों की ज़रूरत की। रॉय के मुताबिक़, महामारी एक नई दुनिया की दहलीज़ है। जहाँ आज यह महामारी बीमारियाँ और तबाही लेकर आई है, वहीं यह एक नई क़िस्म की इंसानियत के लिए दावत भी है। यह एक मौक़ा है कि हम एक नई दुनिया का सपना देख सकें। आज के समय में जब समाज को बाँटने और नफ़रत की राजनीति मज़बूत हो रही है, ऐसे में लेखिका विचार करती हैं कि क़िस्सागोई और भाषा की भूमिका कितनी अहम है। किताब का ख़ास हिस्सा नए नागरिकता क़ानून (सीएए) और एनपीआर-एनसीआर के बारे में है, और इनके ख़िलाफ़ आंदोलनों के बारे में भी। लेखिका ने इस राजनीति और बँटे हुए समाज में कोरोना महामारी के मायने और प्रभाव को एक गहरी नज़र से देखने की कोशिश की है। एक उपन्यासकार के रूप में लेखिका ने अपने दोनों उपन्यासों को सोचने और उन्हें लिखने की प्रक्रिया पर विस्तार से लिखा है। साथ ही एक निबंध लेखक के रूप में अपने काम पर भी एक निगाह डाली है। अनुवाद ऐसा जैसे किताब मूल हिन्दी में लिखी गई हो।.

Arundhati Roy

Arundhati Roy is the author of The God of Small Things, which won the Booker Prize in 1997 and was a bestseller in more than thirty languages worldwide.

Since then Roy has published five books of influential non-fiction essays that include The Algebra of Infinite Justice (2001), Listening to Grasshoppers (2009), and Broken Republic (2011). She has raised profound questions about war and peace, the definitions of “violence” and “non-violence”, about what we think of as “development”, “democracy”, “nationalism”, “patriotism” and indeed the idea of civilization itself.

Roy is a trained architect. She lives in New Delhi.

Reyazul Haque

अरुंधति रॉय ने वास्तुकला का अध्ययन किया है। आप द गॉड ऑफ़ स्माल थिग्स—जिसके लिए आपको 1997 का बुकर पुरस्कार प्राप्त हुआ—और द मिनिस्ट्री ऑफ़ अटमोस्ट हैप्पीनेस की लेखिका हैं। दुनियाभर में इन दोनों उपन्यासों का अनेक भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। आपकी पुस्तकें मामूली चीज़ों का देवता, अपार खुशी का घराना, बेपनाह शादमानी की ममलिकत (उर्दू में), न्याय का गणित, आहत देश, भूमकाल: कॉमरेडों के साथ, कठघरे में लोकतंत्र, एक था डॉक्टर एक था संत राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित हुई हैं। माय सीडिशियस हार्ट आपकी समग्र कथेतर रचनाओं का संकलन है। आप 2002 के लनन कल्चरल फ्रीडम पुरस्कार, 2015 के आंबेडकर सुदार पुरस्कार और महात्मा जोतिबा फुले पुरस्कार से सम्मानित हैं। रेयाज़ुल हक़ ने बेर्तोल्त ब्रेख्त और डॉ. बी.आर. आंबेडकर की सैद्धांतिकी पर शोध किया है और फ़िलहाल सिनेमा पर काम कर रहे हैं। पत्रिकाओं और प्रकाशनों में पत्रकार और संपादक रहे, रेयाज़ुल हक़ ने अरुंधति रॉय, आनंद तेलतुंबड़े, एदुआर्दो गालेआनो, ख़ालिद हुसैनी, न्गुगी वा थ्योंगो, पाब्लो नेरुदा और बेर्तोल्त ब्रेख्त की किताबों का अनुवाद किया है।.
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