Kahavato Ki Kahaniya

Author:

Dr. Pratap Anam

Publisher:

V & S Publishers

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Publisher

V & S Publishers

Publication Year 2018
ISBN-13

9789381448182

ISBN-10 9789381448182
Binding

Paperback

Edition First
Number of Pages 120 Pages
Language (Hindi)
Dimensions (Cms) 24X18.2X0.6
Weight (grms) 224
कहावतें जन-जीवन में बरसों-बरस से रची-बसी चली आई हैं और आगे भी यह सिलसिला निरंतर जारी रहने वाला है। ये बड़ी मनोरंजक, चुटीली और अर्थपूर्ण होती हैं। कहावतों के प्रयोग से आपका लिखा हुआ प्रारूप या रचना, या फिर आपका भाषण या वक्तव्य सौंदर्य और शक्ति ग्रहण करता है। इससे आपकी लिखित या मौखिक अभिव्यक्ति प्रभावशाली बन जाती है और आपके विचार भी वजनदार हो जाते हैं। कहावतें इतनी खांटी और भदेस होती हैं कि सुनने वाले के भीतर तक उतरती चली जाती हैं। इनमें बोलने के साथ ही दृश्य-चित्र को साकार कर देने की अपार क्षमता होती है। कहावतें आपकी भाषा को सजा-संवार कर संस्कार भेंट करती हैं। इस पुस्तक में सैंकड़ों में से चुनकर 51 कहावतों को लिया गया है, जो रोजमर्रा के जीवन में प्रयोग की जाती हैं। एक बच्चे को भी कहीं पढ़कर यह जिज्ञासा हो सकती है कि ‘एक तो करेला दूसरा नीम चढ़ा' या ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस' या ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा' या ‘शेर का डर नहीं जितना टपके का' इनका क्या मतलब है? यह पुस्तक उनकी ऐसी जिज्ञासाओं की तुष्टि करती है। इन्हीं कहावतों के जन्म की रोचक-मनोरंजक और लोकप्रिय कहानियां इसमें दी गई हैं।

Dr. Pratap Anam

अनम प्रताप का जन्म १९५०में उत्तरप्रदेश के इटावा में हुआ उन्होंने हिंदी साहित्य में एम ए करने के बाद पी एच डी किया। इनकी रचनाये नवभारत टाइम्स , हिंदुस्तान , जनसत्ता , साप्ताहिक हिंदुस्तान , संडे मेला , गंगा , सर्वनाम आदि पत्र पत्रिकाओं में छपती रहती हैं।
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