Pratinidhi Kahaniyan

Author:

Premchand

Publisher:

Rajkamal Parkashan Pvt Ltd

Rs176 Rs195 10% OFF

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Publisher

Rajkamal Parkashan Pvt Ltd

Publication Year 2018
ISBN-13

9788171781379

ISBN-10 8171781373
Binding

Hardcover

Number of Pages 138 Pages
Language (Hindi)
Dimensions (Cms) 20 x 14 x 4
Weight (grms) 222
भारतीय ग्रामीण जीवन और जनमानस की विभिन्न स्थितियों के अप्रतिम चितेरे मुंशी प्रेमचंद विश्व विख्यात साहित्यकारों की पनकी में आते हैं! उनकी ये प्रतिनिधि कहानियां प्रायः पूरी दुनिया की पाठकीय चेतना का हिस्सा बन चुकी हैं! सुप्रसिध्ह प्रगतिशील कथाकार भीष्म साहनी द्वारा चयनित ये कहानियां भारतीय समाज और उसके स्वाभाव के जिन विभिन्न मसलो को उठती हैं, ‘आजादी’ के बावजूद वे आज और भी विकराल हो उठे हैं, और जैसा कि भीष्म जी ने संकलन की भूमिका में कहा है कि ‘प्रेमचंद की मृत्यु के पचास साल बाद आज उनका साहित्य हमारे लिए एक चेतावनी के रूप में उपस्थित है! जिन विषमताओं से प्रेमचंद अपने साहित्य में जूझते रहे, उनमें से केवल ब्रिटिश शासन हमारे बीच मौजूद नहीं है, शेष सब तो किसी-न-किसी रूप में वैसी-की-वैसी मौजूद हैं!’वस्तुतः प्रेमचंद ने हमारे साहित्य में जिस नए युग का सूत्रपात किया था, साहित्य को वे जिस तरह जीवन के निकट अथवा जीवन को साहित्य के केंद्र में ले आए थे, वह हमारे लिए आज भी प्रासंगिक है!

Premchand

Premchand, an Indian writer (novel writer, story writer and dramatist), was born in the year 1880 at 31st of July in the Lamhi village (near Varanasi). He is the famous writer of the early 20th century. He got died at 8th of October in 1936 by serving the people with his great writings. The birth name of him is Dhanpat Rai Srivastav and pen name is Nawab Rai. He wrote his all writings with his pen name. Finally his name changed to the Munshi Premchand. His first name Munshi is an honorary prefix given by his lovers in the society because of his quality and effective writings. As a Hindi writer he wrote approximately dozen novels, 250 short stories, numerous essays and translations.
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