| Publisher |
V&S Publishers |
| Publication Year |
2012 |
| ISBN-13 |
9789381588253 |
| ISBN-10 |
9789381588253 |
| Binding |
Paperback |
| Edition |
First |
| Number of Pages |
106 Pages |
| Language |
(Hindi) |
| Dimensions (Cms) |
20.6x13.7x0.7 |
| Weight (grms) |
146 |
| Subject |
Self Help And Personal Development |
प्रस्तुत पुस्तक में लेखक नरेन्द्रनाथ चतुर्वेदी ने स्वाभिमान का अर्थ समझाते हुए इसके विकास और इसे बढ़ाने के तरीकों का उल्लेख किया है। आत्म-सम्मान के बिना एक व्यक्ति जीवित लाश की तरह है, इसलिए किसी भी स्वाभिमानी व्यक्ति के लिए आत्म-सम्मान बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण है। हम अपने आत्म सम्मान को बनाए रखने में सक्षम क्यों नहीं हैं या वे कौन से तत्व हैं जो हमें इससे वंचित करते हैं, लेखक ने सभी कारणों और तत्वों पर गंभीरता से विचार किया है और इसके लिए एक रास्ता सुझाया है जिससे हमारे आत्म सम्मान का पालन करने और बनाए रखने के लिए, हम सुखी और खुशहाल जीवन जी सकते हैं। आप सभी को पढ़ने और सीखने के लिए और पूरे परिवार को पढ़ाने के लिए भी इस पुस्तक को पढ़ना चाहिए।
Dr. Narendra Nath Chaturvedi
Dr. Narendra Nath Chaturvedi
V&S Publishers