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BIN PANI SAB SOON  

Author :

Anupam Mishra

Publisher:

Rajkamal Prakashan

Rs374 Rs499 25% OFF

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Publisher

Rajkamal Prakashan

Publication Year 2020
ISBN-13

9789389577716

ISBN-10 9789389577716
Binding

Paperback

Number of Pages 399 Pages
Language (Hindi)
Dimensions (Cms) 20 x 14 x 4
Subject

Literature & Fiction

अनुपम मिश्र हमारे समय के उन बिरले सोचने-समझनेवाले चौकन्ने लोगों में से थे जिन्होंने लगातार हमें पानी के संकट की याद दिलाई, चेतावनी दी, पानी के सामुदायिक संचयन की भारतीय प्रणालियों से हमारा परिचय कराया। उनका इसरार था कि हम लोकबुद्धि से भी सीखें। उनकी असमय मृत्यु के बाद जो सामग्री मिली है उसमें से यह संचयन किया गया है। वह हिन्दी में बची ज़मीनी सोच और लोकचिन्ताओं से एक बार फिर हमें अवगत कराता है। वह इसका साक्ष्य भी है कि साफ़-सुथरा गद्य साफ़-सुथरे माथे से ही लिखा जा सकता है। "

Anupam Mishra

5 जून 1948 -19 दिसम्बर 2016) पिता: स्वर्गीय श्री भवानीप्रसाद मिश्र जन्म स्थान: वर्धा (महाराष्ट्र) शिक्षण योग्यता: एम. ए. दक्षता: फोटोग्राफी एवं लेखन वर्ष 1977 में पर्यावरण कक्ष के संचालक के रूप में गाँधी शान्ति प्रतिष्ठान से जुड़े। पारम्परिक जल संरक्षण के लिए वर्ष 1992 में के.के. बिड़ला फेलोशिप। मुख्य कृतियाँ: छोटी-बड़ी 20 किताबें, जिनमें प्रमुख हैं—आज भी खरे हैं तालाब, राजस्थान की रजत बूँदें, साफ माथे का समाज, महासागर से मिलने की शिक्षा, अच्छे विचारों का अकाल। आज भी खरे हैं तालाब और राजस्थान की रजत बूँदे का समाज ने अच्छा स्वागत किया है। आज भी खरे हैं तालाब का उर्दू, बाङ्ला, मराठी, गुजराती, पंजाबी और अँग्रेज़ी तथा राजस्थान की रजत बूँदे के फ्रेंच, अँग्रेज़ी, बाङ्ला अनुवाद भी प्रकाशित हुए हैं। इनके अलावा अकाल की परिस्थितियों में देश के 11 आकाशवाणी केन्द्रों ने इन पुस्तकों को पूरा का पूरा प्रसारित किया है। सम्मान: इन्दिरा गाँधी वृक्षमित्र पुरस्कार, 1986, चन्द्रशेखर आज़ाद राष्ट्रीय पुरस्कार, जमनालाल बजाज पुरस्कार, वैद सम्मान, दिल्ली हिन्दी अकादेमी सम्मान।
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