| Publisher |
Eka |
| Publication Year |
2019 |
| ISBN-13 |
9789387894730 |
| ISBN-10 |
9789387894730 |
| Binding |
Paperback |
| Number of Pages |
176 Pages |
| Language |
(Hindi) |
| Dimensions (Cms) |
19.8x13x1.2 |
| Weight (grms) |
450 |
| Subject |
Contemporary Fiction |
पूजा प्रकाश बिहार के एक छोटे से शहर से अपने सपनों का सूटकेस उठाए दिल्ली चली आती है। अठारह साल की उम्र में ही उसकी आंखों ने पुलिस अफ़सर बनने का मुश्किल सपना तो देख लिया है, लेकिन दिल्ली की रोज़मर्रा की ज़िंदगी के संघर्ष उन सपनीली आंखों की किरकिरी बन जाते हैं। भली लड़कियाँ, बुरी लड़कियाँ की बुनावट की नींव में रोज़-रोज़ की यही जद्दोज़ेहद है, जिसका सामना दिल्ली शहर में रहने वाली हर लड़की किसी न किसी रूप में करती है। यह उपन्यास जवानी की दहलीज़ पर क़दम रखती पूजा प्रकाश के प्रेम में पड़ने, धोखे खाने, और उन धोखों से सबक लेते हुए अपने तथाकथित प्रेमी को सबक सिखाने की सतर्क चालें बुनने की कहानी बयां करता है। यह कहानी जितनी पूजा की है, उतनी ही उसके साथ उसकी पीजी में रहने वाली लड़कियों—मेघना सिम्ते, सैम तनेजा और देबजानी घोष की भी है। अलग-अलग परिवेशों और सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमियों से आई ये लड़कियां किस तरह एक-दूसरे के साथ खड़ी होकर इस पुरुषवादी समाज के एक और हमले का मुक़ाबला करती हैं—भली लड़कियाँ, बुरी लड़कियाँ उसी की कहानी है।
Anu Singh Choudhary
फ़िल्मकार, स्क्रीनराइटर, एडिटर, अनुवादक, स्तंभकार, एक्स-पत्रकार। यानी दूसरे शब्दों में ‘मौक़ापरस्त’! मूलत: बिहार से। ‘नीला स्कार्फ़’ (कहानी-संग्रह; 2014) और ‘मम्मा की डायरी’ (कथेतर; 2015) हिन्द युग्म से प्रकाशित। ये दोनों किताबें दैनिक जागरण नील्सन बेस्टसेलर सूची में शामिल हो चुकी हैं। ‘मम्मा की डायरी’ मदरहुड-पैरेंटिंग विषय पर हिंदी में लिखी गई अपनी तरह की पहली और एकमात्र किताब है। ‘गांव कनेक्शन’ के लिए रिपोर्टिंग करते हुए रामनाथ गोयनका अवॉर्ड और लाडली अवॉर्ड मिला। इन दिनों मुंबई, दिल्ली, पूर्णिया और गैंगटोक के बीच कहीं ठिकाने की तलाश में हैं।
Anu Singh Choudhary
Eka