Buy 9788194415084, 9788194415084 at Best Price Online - Buy Books India

9788194415084

Author :

Shariq Kaifi

Publisher:

Rekhta Publication

Rs212 Rs249 15% OFF

Availability: Available

Shipping-Time: Usually Ships 1-3 Days

    

Rating and Reviews

0.0 / 5

5
0%
0

4
0%
0

3
0%
0

2
0%
0

1
0%
0
Publisher

Rekhta Publication

ISBN-13

9788194415084

ISBN-10 819441508X
Binding

Paperback

Edition 2017
Number of Pages 165 Pages
Language (Hindi)
Subject

Poetry

प्रस्तुत किताब रेख़्ता नुमाइन्दा कलाम’ सिलसिले के तहत प्रकाशित प्रसिद्ध उर्दू शाइर शारिक़ कैफ़ी का काव्य-संग्रह है| शारिक़ कैफ़ी की शाइरी बहुत ही सूक्ष्म भावनाओं की शाइरी है जिसमें इन्सानी मन के ऐसे भावों को बेहद सरल भाषा में अभिव्यक्त किया गया है जो हमारे मन में आते तो अक्सर हैं मगर कई बार हम उनकी मौजूदगी को पहचानने से चूक जाते हैं| यह किताब देवनागरी लिपि में प्रकाशित हुई है और पाठकों के बीच ख़ूब पसंद की गई है|

Shariq Kaifi

शारिक़ कैफ़ी (सय्यद शारिक़ हुसैन) बरेली (उत्तर प्रदेश) में 1961 में पैदा हुए। वहीं बी.एस.सी. और एम.ए. (उर्दू) तक शिक्षा प्राप्त की। उनके पिता कैफ़ी विज्दानी (सय्यद रिफ़अत हुसैन) मशहूर शाइ'र थे, इस तरह शाइ'री उन्हें विरासत में हासिल हुई। उनकी ग़ज़लों का पहला मज्मूआ' 'आ'म सा रद्द-ए-अ'मल' 1989 में प्रकाशित हुआ था। इसके बाद, 2008 में दूसरा ग़ज़ल-संग्रह 'यहाँ तक रौशनी आती कहाँ थी' और 2010 में नज़्मों का मजमूआ' 'अपने तमाशे का टिकट' प्रकाशित हुआ। 2017 में ग़ज़ल-नज़्म की एक किताब 'खिड़की तो मैंने खोल ही ली' देवनागरी में प्रकाशित हुई। 2019 में 'देखो क्या क्या भूल गए हम' के नाम से ग़ज़लों और नज़्मों का एक संग्रह उर्दू में सामने आया।
No Review Found
Similar Books
More from Author