Buy Aadivasi Darshan, 9789360865320 at Best Price Online - Buy Books India

Aadivasi Darshan

Author :

Ranendra

,

Samar Basu Mallik

,

Santosh Kido

,

Monika Rani Tuti

,

Rakesh Ranjan Oraon

,

Amrita Priyanka Ekka

Publisher:

Rajkamal Prakashan

Rs746 Rs995 25% OFF

Availability: Available

Shipping-Time: Usually Ships 1-3 Days

    

Rating and Reviews

0.0 / 5

5
0%
0

4
0%
0

3
0%
0

2
0%
0

1
0%
0
Publisher

Rajkamal Prakashan

Publication Year 2024
ISBN-13

9789360865320

ISBN-10 936086532X
Binding

Hardcover

Number of Pages 408 Pages
Language (Hindi)
Dimensions (Cms) 21.5 × 14 × 2.5
Weight (grms) 520
Subject

Reference

सभ्यता और संस्कृति के स्तर पर किसी भी समुदाय की जीवनीशक्ति मूलत: उस समुदाय के दार्शनिक चिन्तन में निहित होती है। जिज्ञासा इस चिन्तन का बीज है और कल्पना उसके अँखुआने के लिए आवश्यक जल। इस तरह जो यात्रा आरम्भ होती है वह दर्शन के दायरे में तब प्रवेश करती है जब कल्पना और कल्पनाशक्ति से आगे बुद्धि और विवेक प्रधान हो जाते हैं, तब अज्ञात की गुत्थी खोलने में अलौकिक माध्यमों का परित्याग कर दिया जाता है और अनुभव को तथ्यों की जाँच और व्याख्या का आधार बनाया जाता है। इस मामले में आदिवासी समुदाय भी अपवाद नहीं है। लेकिन दर्शन सम्बन्धी विचार-विमर्शों में आदिवासी समुदायों का सन्दर्भ अब तक प्राय: अनुपस्थित रहा है, जबकि पृथ्वी के प्राचीनतम बाशिन्दों के रूप में वे आदि जिज्ञासु और आदि चिन्तक रहे हैं। उनकी एक सुचिन्तित दर्शन-परम्परा है, जो उनके धर्म—जिन्हें आदि धर्म, सनातन धर्म, गोंडी धर्म, पूयेम धर्म जैसी कई संज्ञाओं से जाना जाता है—सम्बन्धी धारणाओं में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। यह जरूर है कि इतर समुदायों के विपरीत आदिवासी समुदायों का दार्शनिक चिन्तन वाचिक रूप में ही रहा है।

यह हिन्दी में किंचित पहली पुस्तक है जिसमें आदिवासी दर्शन के बुनियादी तत्त्वों का परिचय और विवेचन प्रस्तुत किया गया है। भारत के विभिन्न भागों-अनेक आदिवासी समुदायों के दर्शन-चिन्तन, सृष्टि-कथा, तत्त्व मीमांसा, सत्ता-मीमांसा, ज्ञान-मीमांसा आदि विषयक विचारोत्तेजक सामग्री इस पुस्तक में संकलित की गई है। इसकी एक उल्लेखनीय विशेषता यह है कि इसमें आदिवासी दर्शन को प्रस्तुत करने वाले विद्धानों में गैर आदिवासी और विदेशी विद्वान भी शामिल हैं जिनके अनुभव, अध्ययन और चिन्तन-मनन ने इस विषय को व्यापकता प्रदान की है।

संक्षेप में, इतर समुदायों की तरह मनुष्य या ईश्वर केन्द्रित न होकर प्रकृति केन्द्रित आदिवासी दार्शनिक चिन्तन के विविध पहलुओं को सामने लाने वाली यह कृति निश्चय ही पाठक को एक नई दृष्टि प्रदान करेगी।

Ranendra

रणेन्द्र का जन्म 4 मार्च 1960 को बिहार के नालन्दा जिले के सोहसराय में हुआ। प्रशासनिक सेवा से सम्बद्ध रहे रणेन्द्र की प्रकाशित कृतियाँ है: ग्लोबल गाँव के देवता, गायब होता देश, गूँगी रूलाई का कोरस (उपन्यास), रात बाकी एवं अन्य कहानियाँ, छप्पन छुरी बहत्तर पेंच (कहानी-संग्रह) और थोड़ा-सा स्त्री होना चाहता हूँ (कविता संग्रह)। इन्होंने ‘झारखण्ड एन्साइक्लोपीडिया’ और ‘पंचायती राज: हाशिये से हुकूमत तक’ का सम्पादन भी किया है। इनकी अनेक रचनाएँ कई भाषाओं में अनूदित हो चुकी हैं। ‘ग्लोबल गाँव के देवता’ का अंग्रेजी अनुवाद ‘लॉड् र्स ऑफ ग्लोबल विलेज’ नाम से प्रकाशित हो चुका है। इन्हें श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको सम्मान, प्रथम विमलादेवी स्मृति सम्मान, वनमाली कथा सम्मान, बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान, जे.सी. जोशी स्मृति जनप्रिय लेखक सम्मान कई और अनेक सम्मानों से सम्मानित किए जा चुका है। सम्प्रतिः डॉ. रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान, झारखंड सरकार के निदेशक हैं।

Samar Basu Mallik

समर बसु मल्लिक पचास साल से आदिवासी अधिकार-आन्दोलनों में सक्रिय। आदिवासी मुद्दों पर कई लेख और पुस्तकें प्रकाशित जिनमें पद्म श्री डॉ. रामदयाल मुंडा के साथ मिलकर झारखंड आन्दोलन पर लिखी एक पुस्तक भी शामिल। संजय बसु मल्लिक के नाम से भी जाने जाते हैं।

Santosh Kido

सेंट जेवियर कॉलेज, राँची (झारखंड) में अध्यापन। आदिवासी दर्शन पर पी-एच.डी.। मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा पर एक शोधपरक पुस्तक और अंग्रेजी में दो उपन्यास प्रकाशित। पूर्व में पत्रकारिता से जुड़े रहे। फिलहाल ‘अदृश्य हिंसा’ विषय पर एक शोध-अध्ययन में सक्रिय।

Monika Rani Tuti

झारखंड प्रशासनिक सेवा की वरीय पदाधिकारी। अर्थशास्त्र की अध्येता। वर्तमान में डॉ. रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान, झारखंड सरकार, राँची की उप निदेशक।

Rakesh Ranjan Oraon

झारखंड प्रशासनिक सेवा के पदाधिकारी। समाजशास्त्र के अध्येता। वर्तमान में डॉ. रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान, झारखंड सरकार, राँची के सहायक निदेशक।

Amrita Priyanka Ekka

झारखंड प्रशासनिक सेवा की पदाधिकारी। समाजशास्त्र की अध्येता। वर्तमान में डॉ. रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान, झारखंड सरकार, राँची की सहायक निदेशक।
No Review Found
Similar Books
More from Author