| Publisher |
Readomania |
| Publication Year |
2023 |
| ISBN-13 |
9789391800550 |
| ISBN-10 |
9391800556 |
| Binding |
Paperback |
| Number of Pages |
239 Pages |
| Language |
(Hindi) |
| Weight (grms) |
359 |
| Subject |
Historical Fiction |
नालन्दा विश्वविद्यालय भारतवर्ष का गौरव उस सदी में था, जब दूर दूर के देशों में शिक्षा के क्षेत्र में अंधेरा था। देवाहुति, एक निडर, चंचल बाल विधवा सारे नियम क़ानून तोड़ पढ़ना चाहती थी जो नालन्दा ग्राम वासियों को मंज़ूर न था। उन्हें लगता था कि देवाहुति अवश्य ही नालन्दा की बरबादी का कारण बनेगी। क्या ऐसा हुआ ? किसने जला कर ख़ाक किया नालन्दा विश्वविद्यालय को और क्यों? दूसरी ओर आज के युग की पत्रकार है - चाँदनी जो जी20 सम्मेलन को कवर करने लंदन जाती है। वहाँ वह एक अजीब से पचड़े में पड़ जाती है। और वहाँ उसका बड़े अजीब अंदाज़ में नालन्दा की धधकती आग से सामना होता है। क्या चाँदनी लंदन से सही सलामत वापस लौट पाएगी? क्या देवाहुति नालन्दा के श्राप से कभी मुक्ति पा सकेगी? क्या है चाँदनी और देवाहुति की कहानी? क्या इतिहास कभी भूल पाएगा नालन्दा की बरबादी के दुष्टों को? दोनों की उलझनें क्या हैं, क्यो हैं? अभिशप्त नालँदा दिलचस्प कहानी सुना कर इन सभी सवालों के जवाब ढूँढती है।
Manna Bahadur
Readomania