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Rampriya Bharat : Symbol of Service, Determination and Dedication (Hindi)

Author :

Aditya Shukla

Publisher:

Prabhat Prakashan

Rs300 Rs400 25% OFF

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Publisher

Prabhat Prakashan

Publication Year 2024
ISBN-13

9788197142949

ISBN-10 8197142947
Binding

Paperback

Number of Pages 248 Pages
Language (Hindi)
Weight (grms) 400
Subject

Devotional

संसार में जितने भी महापुरुष हुए हैं, उनके जीवन का संघर्ष बहुधा बाह्यजगत् का संघर्ष है। श्रीराम एवं श्रीकृष्ण भी इनमें शामिल हैं, क्योंकि उनके शत्रु क्रमश: रावण एव कंस बाह्यजगत् में उपस्थित थे। इस सृष्टि में श्रीभरत ही एकमात्र ऐसे महापुरुष हैं, जो अजातशत्रु हैं। बाह्यजगत् में न तो उनका कोई शत्रु है और न ही किसी से कोई संघर्ष। लेकिन भरत के मन में निरंतर एक महासंघर्ष चलता है। भरत का यह संघर्ष नितांत आंतरिक, भावनात्मक एवं मनोवैज्ञानिक है। उनकी लड़ाई स्वयं से स्वयं की लड़ाई है। इस लड़ाई में जीत एवं हार दोनों का कोई विशेष अर्थ नहीं है क्योंकि इस संघर्ष में जय एवं पराजय स्वयं से ही है। अत: मानव-मन में निरंतर चलने वाले संघर्ष के मनोविज्ञान को समझने के लिए भरत एक आदर्श पात्र हैं। आज मनुष्य अपनी क्षमताओं एवं बुद्धि-कौशल के बल पर बाह्यजगत् के संघर्षों से निपटने के लिए स्वयं को सक्षम तो बना लिया है मगर मन की उलझन एवं बिखराव से संघर्ष करने के लिए न तो उसके पास क्षमता है और न ही कोई उपाय। ऐसी परिस्थिति में भरत का चरित्र हम सबके लिए एक महत्त्वपूर्ण मार्गदर्शिका है। भरत महा महिमा जलरासी’ अर्थात् भरत की महिमा समुद्र के समान अथाह है। मानव के अंतर्द्वंद पर विजय प्राप्त करने के लिए श्रीभरत के चरित्र से बढक़र कोई दूसरा चरित्र नहीं है। स्वयं श्रीराम इस गुण के लिए भरतजी का आश्रय लेते हैं।

Aditya Shukla

डॉ. आदित्य शुक्ल एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक, प्रभावी वक्ता, लोकप्रिय लेखक, सुमधुर गीतकार, यथार्थवादी चिंतक तथा मानस के अध्येता यानी बहुमुखी प्रतिभासंपन्न साधक हैं। उन्होंने रसायन शास्त्र में पीएच.डी., ऑपरेशन मैनेजमेंट में एम.बी.ए. एवं हिंदी साहित्य में एम.ए. किया है तथा वर्तमान में ईरा हेल्थ केयर में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) हैं। आदित्य मानस के विभिन्न पात्रों एवं प्रसंगों के वर्तमान संदर्भ में प्रभावी व्याख्या के साथ नई दृष्टि प्रदान करने की विशेष योग्यता के कारण देश-विदेश में जाने जाते हैं। पुराणों के गूढ़ ज्ञान को सामान्य व्यक्ति के लिए सरल, सरस एवं उपयोगी बनाना आदित्य की लेखन एवं व्याख्यान शैली की विशेषता है। प्रमुख पुस्तकें : ‘यदि मिल जाएँ पंख उधार’ (कविता-संग्रह), ‘भैरव भूमि’ (स्वरचित भजनों की सीडी), ‘अनुपम राम’ (व्याख्यान सीडी), ‘अ से अमन पढ़ें’ (हिंदी वर्णमाला पर काव्य-पुस्तिका), ‘बीती बात भुलाता चल’ (गीत-संग्रह), ‘व्यक्तित्व निर्माण में हनुमानजी की भूमिका’ (व्याख्यान शृंखला, 108 एपिसोड), ‘सफल व्यक्तित्व के हनुमान मंत्र’, ‘मेरे राम—नर से नारायण की अनुपम यात्रा’, ‘रामप्रिय भरत’ (जीवन प्रबंधन ग्रंथ)।
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