Availability: Available
Shipping-Time: Usually Ships 3-5 Days
0.0 / 5
| Publisher | HIND YUGM |
| Publication Year | 2026 |
| ISBN-13 | 9788119555499 |
| ISBN-10 | 811955549X |
| Binding | Paperback |
| Number of Pages | 220 Pages |
| Language | (Hindi) |
| Weight (grms) | 206 |
अनिल यादव के साथ महेश मिश्र और अंशतः रवि प्रकाश की यह बातचीत बहुसंख्य मंदमति वार्ताओं के इस दौर में एक विरल मंदगति वार्ता है—बिना किसी हड़बड़ी के चलने वाली एक ऐसी बातचीत जिसमें अनगिनत विषयों पर गहन चर्चा है : साहित्य और रचना-प्रक्रिया से लेकर सभ्यता और समाज-व्यवस्था तक, क़िस्म-क़िस्म के नशीले पदार्थों के गुणधर्म से लेकर मृत्यु के दर्शन (फ़लसफ़ा और देखना, दोनों अर्थों में) तक, निजी जीवनानुभवों से लेकर हिंसा और उन्माद पर क़ायम मौजूदा राजनीतिक-सामाजिक गोलबंदियों तक, और भी बहुत कुछ से लेकर और भी बहुत कुछ तक। किसी भी विषय को धप्पा मार देनेवाले अंदाज़ में सिर्फ़ छुआ नहीं गया है। जो भी इस बातचीत की ज़द में आया, अच्छी तरह खँगाला गया। यहाँ जो विलक्षण स्वतःस्फूर्तता है, वह मुद्दों की विस्मयकारी रूप से व्यापक रेंज में प्रश्नकर्ता और उत्तरदाता की सहज गति और वाजिब सरोकार के बग़ैर संभव न थी। ग़रज़ कि यह बातचीत जितनी मंदगति है, उतनी ही निर्बंध और गहरी भी। साथ ही, यह बराबर मात्रा में उकसाऊ भी है। आप ख़ुद को इस बातचीत का भागीदार बनता हुआ अनुभव करते हैं, और भले ही अनिल यादव के साथ भौतिक रूप से संवाद न कर पाएँ, अपने मन में इस बातचीत को आगे तो बढ़ाते ही हैं! इस बातचीत का अकर्मक उपभोक्ता बने रहना संभव नहीं है।
— संजीव कुमार (आलोचक-संपादक)
Anil Yadav
,Mahesh Mishra
HIND YUGM