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Bhartendu Harishchandra Aur Hindi Navjagran Ki Samasyen

Author :

Late Dr. Ram Vilas Sharma

Publisher:

Rajkamal Prakashan

Rs521 Rs695 25% OFF

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Publisher

Rajkamal Prakashan

Publication Year 2019
ISBN-13

9788171787128

ISBN-10 9788171787128
Binding

Hardcover

Number of Pages 175 Pages
Language (Hindi)
Dimensions (Cms) 20 x 14 x 4
Weight (grms) 281
Subject

Indian Writing

N.A.

Late Dr. Ram Vilas Sharma

जन्म: 10 अक्टूबर, 1912; ग्राम—ऊँचगाँव सानी, जिला—उन्नाव (उत्तर प्रदेश)। शिक्षा: 1932 में बी.ए., 1934 में एम.ए. (अंग्रेजी), 1938 में पीएच.डी. (लखनऊ विश्वविद्यालय)। लखनऊ विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग में पाँच वर्ष तक अध्यापन-कार्य किया। सन् 1943 से 1971 तक आगरा के बलवन्त राजपूत कॉलेज में अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष रहे। बाद में आगरा विश्वविद्यालय के कुलपति के अनुरोध पर के.एम. हिन्दी संस्थान के निदेशक का कार्यभार स्वीकार किया और 1974 में अवकाश लिया। सन् 1949 से 1953 तक रामविलासजी अखिल भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ के महामंत्री रहे। देशभक्ति तथा माक्र्सवादी चेतना रामविलास जी की आलोचना का केन्द्र-बिन्दु हैं। उनकी लेखनी से वाल्मीकि तथा कालिदास से लेकर मुक्तिबोध तक की रचनाओं का मूल्यांकन प्रगतिवादी चेतना के आधार पर हुआ। उन्हें न केवल प्रगति-विरोधी हिन्दी-आलोचना की कला एवं साहित्य-विषयक भ्रान्तियों के निवारण का श्रेय है, वरन् स्वयं प्रगतिवादी आलोचना द्वारा उत्पन्न अन्तर्विरोधों के उन्मूलन का गौरव भी प्राप्त है। सम्मान: केन्द्रीय साहित्य अकादेमी का पुरस्कार तथा हिन्दी अकादेमी, दिल्ली का शताब्दी सम्मान। निधन: 30 मई, 2000.
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