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Bhautiki Nobel Puraskar Vijeta

Author :

BHUVENDRA TYAGI

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Publisher

Unbound Script

ISBN-13

9788169235372

ISBN-10 8169235375
Binding

Hardcover

Edition 2026
Number of Pages 296 Pages
Language (Hindi)
Subject

Science, Technology & Medicine

विज्ञान की दुनिया को बदल देने वाले उन महान मस्तिष्कों से मिलिए, जिन्होंने अपनी खोजों से मानव सभ्यता को नई दिशा दी। “नोबेल पुरस्कार विजेता – भौतिकी” एक ऐसी प्रेरक और ज्ञानवर्धक पुस्तक है, जिसमें अब तक के भौतिकी के नोबेल पुरस्कार विजेताओं के जीवन, उनके संघर्ष, उनकी वैज्ञानिक खोजों और उन खोजों के मानव जीवन पर पड़े गहरे प्रभाव को रोचक शैली में प्रस्तुत किया गया है।

एक साधारण जिज्ञासा से शुरू होकर असाधारण खोज तक पहुँचने की इन वैज्ञानिक यात्राओं में पाठक न केवल विज्ञान के रोमांच को महसूस करेगा, बल्कि यह भी समझ पाएगा कि विचार, प्रयोग और धैर्य किस तरह दुनिया बदल सकते हैं।

पुस्तक में नोबेल पुरस्कार की शुरुआत, उसके पीछे Alfred Nobel की दूरदर्शी सोच, और मानवता के कल्याण के लिए विज्ञान की भूमिका को भी सरल और प्रभावशाली ढंग से समझाया गया है। नोबेल पुरस्कार पहली बार 1901 में प्रदान किए गए थे, और आज भी इन्हें विश्व की सर्वोच्च बौद्धिक उपलब्धियों में गिना जाता है।

यह पुस्तक विद्यार्थियों, विज्ञान-प्रेमियों, प्रतियोगी परीक्षा के अभ्यर्थियों और प्रेरक जीवनियाँ पढ़ने वाले हर पाठक के लिए एक अनमोल संग्रह है।

BHUVENDRA TYAGI

जब हर तरफ दहशत हो, मायूसी हो, लाचारी हो, तो नाउम्मीदी के अँधेरे चारों ओर उग ही आते हैं। तब जरूरत होती है नई आशा की, जो इन अँधेरों को दूर करके मनोबल बढ़ाए और हालात से जूझने का जज्बा दिलाए। ‘आशा’ संग्रह की कविताएँ इसी रोशनी और संबल के प्रसार के लिए हैं। अंग्रेजी के 46 कवियों की 51 कविताओं के अनुवाद का यह कविता संग्रह कोरोना-काल ही नहीं, तमाम विषम परिस्थितियों में एक सच्चे दोस्त और शुभचिंतक की तरह हौसला बनाए रखने की ताकत देनेवाला है। माया एंजेलो की कालजयी कविता ‘फिर भी उठूँगी मैं’, रुडयार्ड किपलिंग की ‘अगर’, कैटी ए. ब्राउन की ‘खुद से हार कभी मत मानो’, जॉयस अलकांतारा की ‘देखोगे नहीं मुझे कभी हारते’, हेनरी वर्ड्सवर्थ लॉन्गफेलो की ‘जीवन-मंत्र’, लैंग्स्टन ह्यूजेस की ‘अब भी जंग में डटा हुआ हूँ’, थॉमस हार्डी की ‘आशा का गीत’, मैक्स एरमन की बहुचर्चित कविता ‘मनोकामनाएँ’ (डेसिडराटा) और बर्टन ब्रैली की ‘चाह जीत की’ जैसी ओजस्वी कविताएँ किसी के भी मन से निराशा दूर करके आशा जगाने और किसी भी निरुत्साही को उत्साह और उमंग से भरकर जीवन को सुंदर बनाने में सक्षम हैं। ये आशा जाग्रत् करने के लिए सहज, सरल, शाश्वत, सार्वभौमिक और सर्वकालीन कविताएँ हैं।
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