Chaturbhani  (Hb)

Author :

Sasudevsharan Agarwal Motichandra

Publisher:

Rajkamal Prakashan

Rs1121 Rs1495 25% OFF

Availability: Available

Shipping-Time: Usually Ships 1-3 Days

    

Rating and Reviews

0.0 / 5

5
0%
0

4
0%
0

3
0%
0

2
0%
0

1
0%
0
Publisher

Rajkamal Prakashan

Publication Year 2020
ISBN-13

9789389577907

ISBN-10 938957790X
Binding

Paperback

Number of Pages 451 Pages
Language (Hindi)
Dimensions (Cms) 20 x 14 x 4
Weight (grms) 850

'चतुर्भाणी’ एक विलक्षण क्लैसिक है : मूल में बोलचाल की संस्कृत और लोक-जीवन की छटाओं का रोचक और नाटकीय इज़हार है और अनुवाद में बनारसी बोली का चटपटा रस-भाव। बरसों पहले ब.व. कारन्त ने उज्जैन के कालिदास समारोह के लिए 'चतुर्भाणी’ की रंग-प्रस्तुति की थी। डॉ. मोतीचन्द्र द्वारा अनूदित और डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल द्वारा विस्तार से समझाई गई इस कृति को नए संस्करण में प्रस्तुत करते हुए हमें गहरा सन्‍तोष है। भारतीय परम्परा की दुर्व्याख्या के इस अभागे समय में यह कृति याद दिलाती है कि हमारी परम्परा में कैसी रसिकता और लोक-जीवन का उन्मुक्त रचाव रहा है जो कहीं से भी किसी संकीर्णता में बाँधा नहीं जा सकता।    


 


—अशोक वाजपेयी।

Sasudevsharan Agarwal Motichandra

डॉ. मोतीचन्द्र (1901-1974) भारतीय संस्कृति, कला, इतिहास, भाषा, साहित्य के प्रमुख विद्वान। वाराणसी में जन्मे और पद्मभूषण से सम्मानित डॉ. मोतीचन्द्र ने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय और लन्दन विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की। आप तीन दशकतकप्रिंस वेल्स संग्रहालय, बम्बई के अध्यक्ष भी रहे। प्रमुख प्रकाशित कृतियाँ: पश्चिम भारत के जैन लघु-चित्र, महाभारत का आर्थिकऔर भौगोलिक अध्ययन, काशी का इतिहास, प्राचीन भारतीय चित्रकला का अध्ययन, सार्थवाह। वासुदेवशरण अग्रवाल (1904-1966) शिक्षा: 1929 में लखनऊ विश्वविद्यालय से एम.ए., 1946 में पीएच.डी. तथा डी.लिट्. की उपाधियाँ प्राप्त कीं। भारतीय साहित्य और संस्कृति के गम्भीर अध्येता के रूप में देश के विद्वानों में अग्रणी डॉ. अग्रवाल 1940 तक मथुरा के पुरातत्व संग्रहालय के अध्यक्ष पद पर रहे। 1946 से लेकर 1954 तक सेण्ट्रल एशियन एक्टिविटीज म्यूजि़यम के सुपरिंटेंडेंट और भारतीय पुरातत्व विभाग के अध्यक्ष पद पर कार्य। 1951 में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कॉलेज ऑफ इंडोलॉजी में प्रोफेसर नियुक्त हुए। 1952 में लखनऊ विश्वविद्यालय में राधाकुमुद मुखर्जी व्याख्यान-निधि की ओर से व्याख्याता नियुक्त हुए। प्रमुख प्रकाशित कृतियाँ: पृथ्वी-पुत्र, उरुज्योति, कला और संस्कृति, कल्पवृक्ष, माता भूमि, हर्षचरित-एक सांस्कृतिक अध्ययन, भारत की मौलिक एकता, मलिक मुहम्मद जायसी: पद्मावत, पाणिनिकालीन भारतवर्ष, भारतसावित्री, कादम्बरी। राधाकुमुद मुखर्जीकृत हिन्दू सभ्यता का अनुवाद।
No Review Found
More from Author