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Aapatkal : Ek Diary-1

Author :

Bishan Tandon

Publisher:

Vani Prakashan

Rs716 Rs895 20% OFF

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Publisher

Vani Prakashan

Publication Year 2018
ISBN-13

9788170551782

ISBN-10 8170551781
Binding

Hardcover

Number of Pages 532 Pages
Language (Hindi)
Weight (grms) 500
Subject

Diaries & Journals

अपने इतिहास और संस्कृति पर गर्व करने वाले इस देश में ऐतिहासिक तथ्यों और सूचनाओं को सँजोने-सँवारने के प्रयत्न बहुत कम होते हैं। जिन परिवारों और व्यक्तियों के पास अपने रेकार्ड, दस्तावेज़, पत्राचार आदि ऐतिहासिक महत्त्व के हैं वे भी उन्हें प्रकाशित नहीं करते। कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने सेवानिवृत्ति के काफी बाद मुख्यतः स्मरणशक्ति के सहारे अपने संस्मरण लिखे हैं पर डायरी रखने का चलन सामान्यतः उनमें नहीं है। इस दृष्टि से बिशन टंडन की डायरी एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ है। यह डायरी लिखी गयी जबकि वे प्रधानमन्त्री के संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत थे। पहले खण्ड में 1 नवम्बर, 1974 से 15 अगस्त, 1975 के घटनाक्रम का विवरण है; दूसरा खण्ड 16 अगस्त, 1975 से 23 जुलाई, 1976 तक की अवधि से सम्बन्धित होगा। डायरी लिखना शुरू करने से पहले लेखक को प्रधानमन्त्री सचिवालय में कार्य करते 5 वर्ष हो चुके थे और उन्हें प्रधानमन्त्री इन्दिरा गाँधी के व्यक्तित्व और कार्य करने की शैली का अच्छा अनुभव हो चुका था। उन्हें यह स्पष्ट दिखाई देने लगा था कि देश को एक गलत राह पर हाँका जा रहा है। एक गम्भीर संकट उत्पन्न होने की आशंका होने लगी थी, जो दुर्भाग्य से ठीक निकली। दिन-प्रतिदिन लिखी गयी डायरी की इन प्रविष्टियों में प्रधानमन्त्री की सत्ता के चरमोत्कर्ष के चित्र के साथ ही तत्कालीन प्रभावी नेताओं के कर्म-कुकर्म, संसद की दुर्दशा, संवैधानिक संस्थाओं की अवमानना, स्वायत्त संस्थाओं के ह्रास की पीड़ादायी पर मार्मिक चित्रण भी है । घटनाओं के साथ इसमें उस वातावरण का चित्रण भी है जो उन घटनाओं से बनता जा रहा था। साथ ही लेखक के अन्तर की पीड़ा भी साफ झलकती है। लेखक ने अपने विद्यार्थी जीवन में अपने दो मित्रों के साथ एक साहित्यिक संस्था 'परिमल' स्थापित की थी, जो धीरे-धीर अत्यन्त महत्त्वपूर्ण हो गयी थी। साहित्य, संगीत, कला के प्रति लेखक की यह रुचि इस डायरी में भी पूरी तरह स्पष्ट है । वास्तव में यह डायरी लेखक का अपने समय के 'रेकार्ड को ठीक-ठाक रखने' का लेखा-जोखा है ।

Bishan Tandon

"बिशन टंडन - बिशन टंडन को अक्षर की सृजनात्मक अभिव्यक्ति और जन-जीवन की समझ-बूझ प्रयाग की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरती से मिली। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. की डिग्री प्राप्त करने के बाद 1951 में उनका आई.ए.एस. में चयन हुआ। अगले बत्तीस वर्ष से अधिक वे उत्तर प्रदेश और केन्द्र सरकार में महत्त्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रहे। सबसे महत्त्वपूर्ण पद प्रधानमन्त्री के संयुक्त सचिव का था जिस पर वे सात वर्ष (1969-76) रहे। जनतन्त्र के इतिहास में यह समय कितना महत्त्वपूर्ण बन गया, यह सर्वविदित है। बिशन टंडन ने 1983 में स्वेच्छा से सर्विस से अवकाश प्राप्त किया। "
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