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| Publisher | HIND YUGM |
| Publication Year | 2026 |
| ISBN-13 | 9788119555420 |
| ISBN-10 | 8119555422 |
| Binding | Paperback |
| Number of Pages | 288 Pages |
| Language | (Hindi) |
| Weight (grms) | 220 |
| Subject | Indian Writing |
ऐसे व्यक्ति की कथा जो स्वतंत्रता-संग्राम में अपनी सक्रिय भागीदारी के कारण युवावस्था में ही एक तेजस्वी नेता के रूप में उभरता है। अपनी पूरी युवावस्था स्वतंत्रता के लिए संघर्ष में झोंक देने के बाद वह पाता है कि देश की स्वाधीनता का लक्ष्य तो प्राप्त हुआ, पर उसके साथी सत्ता-लिप्सा में राजनैतिक अनैतिकताओं के शिकार हो चुके हैं। उनके बीच वह अपने को असहज और असंगत पाता है। देश के आज़ाद होते ही वह सक्रिय राजनीति से संन्यास लेकर अपने मूल व्यवसाय ‘वैद्यकी’ में ख़ुद को संकुचित कर लेता है। वह अनुभव करता है कि स्वाधीन भारत की राजसत्ता और स्वाधीनता-संग्राम के उसके अपने साथी भी उसके संघर्ष को भूल चुके हैं, यहाँ तक कि अपने परिवार के लिए भी अब वह प्रासंगिक नहीं रह पाया है।
Anand Harshul
HIND YUGM