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| Publisher | OM BOOKS INTERNATIONAL |
| Publication Year | 2026 |
| ISBN-13 | 9789363956186 |
| ISBN-10 | 9363956180 |
| Binding | Paperback |
| Number of Pages | 344 Pages |
| Language | (Hindi) |
| Weight (grms) | 340 |
| Subject | New Age & Spirituality |
नीम करोली बाबा, भारत के महान संतों में से एक, सितंबर सन् 1973 में अपनी देह त्यागकर चले गए, किंतु उनकी उपस्थिति आज भी उतनी ही जीवंत है। भौतिक रूप में वे आज हमारे बीच न होते हुए भी दुनिया भर में हजारों लोगों को स्वप्नों और दिव्य दर्शनों में, ध्यान की अवस्था में और कभी-कभी खुले आकाश में अचानक दिखाई दे जाते हैं। वे हृदयों को निस्वार्थ प्रेम की प्रचंड धारा से खोलने आते हैं, मदद के लिए पुकार पर सांत्वना और सहारा देने आते हैं और हमें यह याद दिलाते हैं कि हम सब वास्तव में एक ही हैं।
लेकिन जब किसी को इतने गहरे दिव्य प्रेम का अनुभव होता है, तो उसके बाद अक्सर मन में संदेह उठने लगते हैं— "वह तो केवल एक स्वप्न था। शायद मैंने ही उसकी कल्पना की होगी। मैं उनसे कभी व्यक्तिगत रूप से मिला ही नहीं, फिर मुझे कैसे पता कि वह सचमुच महाराजजी ही थे?" तब मन उन अनुभूतियों को नकारने लगता है, जिन्हें हृदय सच मानता है।
'हृदय में गूँजती प्रेरणा' 150 से अधिक भक्तों की ऐसी सच्ची कहानियाँ साझा करती है और इन अद्भुत अनुभवों को मान्यता प्रदान करती है, जिनमें उन्होंने अपने प्रिय महाराजजी से किसी न किसी रूप में "भेंट" की है। किसी ने उन्हें कीर्तन में नाम-स्मरण करते हुए महसूस किया, किसी ने आध्यात्मिक साधना-शिविर में, तो किसी ने उनके चित्र को देखते हुए। और कुछ अनुभव तो इतने असाधारण हैं कि उन्हें सुनकर मन ठहर-सा जाता है: फ्रांस में एक निराश स्त्री की चौखट पर उनका अचानक आ जाना, ऑस्ट्रेलिया के एक नौ वर्षीय बालक को वर्षों से चले आ रहे अत्याचार से मुक्ति दिलाना, मियामी के किसी सागर-तट पर नृत्य करते हुए दिखाई देना, या ताओस, न्यू मैक्सिको में एक पुलिस अधिकारी के सामने अचानक प्रकट हो जाना।
महाराजजी स्वयं कहा करते थे:
"जब तुम मुझे याद करोगे, मैं वहीं रहूँगा।" इस पुस्तक में आप देखेंगे कि वे आज भी अपने उस वचन को किस तरह पूरा कर रहे हैं।
Parvati Markus
OM BOOKS INTERNATIONAL