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Husnabano Aur Anay Kavitayen

Author :

Prabha Khetan

Publisher:

Vani Prakashan

Rs169 Rs199 15% OFF

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Publisher

Vani Prakashan

Publication Year 2020
ISBN-13

9789389563870

ISBN-10 9389563879
Binding

Paperback

Number of Pages 78 Pages
Language (Hindi)
Dimensions (Cms) 25 x 20 x 3
Weight (grms) 150
Subject

Literature & Fiction

इक्कम-दुक्कम खेलती हुस्नाबानो सोचती इस गली में अब और नहीं बन सकता कोई घर यदि बनता तो क्या वह हमारा होता? भाई मोहसिन का होता? अम्मी का होता? अब्बा का होता?

Prabha Khetan

"प्रभा खेतान जन्म : 1 नवम्बर, 1942 शिक्षा : एम.ए., पी-एच.डी. (दर्शनशास्त्र)। प्रकाशित कृतियाँ : आओ पेपे घर चलें!, छिन्नमस्ता, पीली आँधी, अग्निसंभवा, तालाबंदी, अपने-अपने चेहरे (उपन्यास); अपरिचित उजाले, सीढ़ियाँ चढ़ती हुई मैं, एक और आकाश की खोज में, कृष्ण धर्मा मैं, हुस्न बानो और अन्य कविताएँ अहल्या (कविता); उपनिवेश में स्त्री, सार्त्र का अस्तित्ववाद, शब्दों का मसीहा : सार्त्र, अल्बेयर कामू : वह पहला आदमी (चिन्तन); साँकलों में कैद कुछ क्षितिज (कुछ दक्षिण अफ्रीकी कविताएँ), स्त्री : उपेक्षिता (सीमोन द बोउवार की विश्व-प्रसिद्ध कृति द सेकंड सेक्स) (अनुवाद)। एक और पहचान, हंस का स्त्री विशेषांक भूमंडलीकरण : पितृसत्ता के नये रूप (सम्पादन)। निधन : 20 सितम्बर, 2008"
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