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Laal Batti Aur Gulel

Author :

Subhash Chandra Kushwaha

Publisher:

HIND YUGM

Rs135 Rs150 10% OFF

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Publisher

HIND YUGM

Publication Year 2020
ISBN-13

9788194653806

ISBN-10 8194653800
Binding

Paperback

Edition 1st
Number of Pages 208 Pages
Language (Hindi)
Subject

Short Stories

सुभाष चंद कुशवाहा की कहानियों में आज के बदलते गाँवों की बजबजाहट है, लूट, झूठ और फूट है। ये कहानियाँ उस नए हिंदुस्तान की ओर ले जाती हैं जहाँ ग़ैरबराबरी, जातिवाद, छुआछूत, धार्मिक उन्माद और आतंकवाद की खोल में अंध राष्ट्रवाद ने अपनी करतूतों से श्रमशील समाज को डरा दिया है। राजनीति के पैंतरे अन हो चले हैं। मुख्यधारा से अलग कर दिए गए समाज के साथ ये कहानियाँ, वर्तमान की उम्मीदों की महावृतांत रचती हैं। इनमें लोक समाज की धड़कनों को, वृहत्तर आयाम में सुना जा सकता है। कुल-मिलाकर आज के तिकड़मों और भारतीय लोक समाज की दुर्दशा को समझने में ये कहानियाँ हमारी मदद करती हैं।.

Subhash Chandra Kushwaha

जन्म : 26 अप्रैल, 1961 को ग्राम जोगिया जनूबी पट्टी, फाजिलनगर, कुशीनगर, (उत्तर प्रदेश)में। शिक्षा : स्नातकोत्तर (विज्ञान) सांख्यिकी। प्रकाशित पुस्तकें : ‘आशा’, ‘कैद में है जि़न्दगी’, ‘गाँव हुए बेगाने अब’ (कविता); ‘हाकिम सराय का आखिरी आदमी’, ‘बूचड़खाना’, ‘होशियारी खटक रही है’, ‘लाला हरपाल के जूते और अन्य कहानियाँ’ (कहानी); ‘चौरी चौरा : विद्रोह और स्वाधीनता आन्दोलन’ (इतिहास); ‘कथा में गाँव’, ‘जातिदंश की कहानियाँ’, ‘कथादेश’ साहित्यिक पत्रिका का किसान विशेषांक—‘किसान जीवन का यथार्थ : एक फोकस’ तथा ‘लोकरंग वार्षिकी’ का 1998 से निरन्तर सम्पादन। सम्मान : ‘सृजन सम्मान’, ‘प्रेमचंद स्मृति कथा सम्मान’, ‘आचार्य निरंजननाथ सम्मान’ आदि।
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