Dhuadhaar

Author :

Pramod Singh

Publisher:

HIND YUGM

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Publisher

HIND YUGM

Publication Year 2026
ISBN-13

9788119555352

ISBN-10 811955535X
Binding

Paperback

Number of Pages 268 Pages
Language (Hindi)
Dimensions (Cms) 21.6 X 14 X 1.5
Weight (grms) 220
Subject

Crime & Thriller

ज़रा-सा तो जसपुर। और वैसे ही उसके चिंदी मामले। क्या खाकर कोई अपराध करता और भागकर फिर जाता कहाँ! पीतल का घड़ा और साइकिल की चोरी से ज़्यादा अपराधों के अरमान नहीं थे। उनको हैंडल करने को एक थाना काफ़ी था। थाना प्रभारी मुन्ना ख़ान काफ़ी थे। जब से लोग देख रहे हैं लहीम-शहीम, डुगरती चाल के मुन्ना ख़ान को ही देख रहे हैं। जसपुर में पुलिस का मतलब मुन्ना ख़ान। उँगलियों में फँसी बीड़ी, दमे की खरखराती आवाज़, आवाज़ कभी ऊँची नहीं हुई। स्वभाव वैसा है, न कभी ज़रूरत पड़ी। अब एकदम-से पड़ी है तो समूचा जसपुर हैरान है। कुछ महीनों में रिटायर होते, फ़ि‍लहाल बेदम मुन्ना दायें-बायें सहारा तलाश रहे हैं। एक पर एक शहर के नामचीन नागरिकों की हत्याएँ हुई हैं, और केस सुलझाने की थाना प्रभारी के सामर्थ्य पर सवाल उठ रहे हैं। घर में बिस्तर से लगी लाचार बीवी की देखभाल का ज़िम्मा है और बाहर ख़ुद पर जान का ख़तरा। जसपुर की तो जाने दें, जान जाने के जोख़िमभरे खेल में मुन्ना खान ख़ुद को भी बचा पाएगा?

Pramod Singh

घूमने का पुराना शौक़ रहा है। घुमाने का भी। ज़्यादा घुमाने का ही रहा है। चीन पहुँच लेना इसी तरह का संयोग रहा होगा। जबकि गाओपिंग से प्रेम को संयोग से ज़्यादा सपना समझा जाना चाहिए। कभी-कभी सपने सच हो जाते हैं। जैसे एक फ़िल्म बनाने का है, क्या मालूम चीन से लौटकर सच हो ही जाए। इससे पहले एक किताब छपी है- ‘अजाने मेलों में’।
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