Jaati Janaganana – Dr. Laxman Yadav | जाति जनगणना – डॉ. लक्ष्मण यादव

Author :

Dr. Laxman Yadav

Publisher:

Yuvaan Books

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Publisher

Yuvaan Books

Publication Year 2026
ISBN-13

9789347125287

ISBN-10 9347125288
Binding

Paperback

Number of Pages 170 Pages
Language (Hindi)
Weight (grms) 100
Subject

Politics & Government

जाति जनगणना का सवाल सिर्फ़ आँकड़ों का सवाल नहीं है। यह सत्ता, संसाधन, प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय का सवाल है। यह किताब इसी सवाल को इतिहास की गहराई, राजनीति की जटिलता और समाज की संरचना के साथ जोड़कर देखती है। डॉ. लक्ष्मण यादव की यह पुस्तक जाति जनगणना को किसी ख़ास दौर तक सीमित नहीं करती, बल्कि उसे मानव सभ्यता की शुरुआती गिनतियों से लेकर आज़ाद भारत की राजनीतिक बहसों तक फैले लंबे सामाजिक-सांस्कृतिक प्रवाह में रखती है। किताब का बड़ा हिस्सा आधुनिक भारत में जाति जनगणना के इर्द-गिर्द खड़े आंदोलनों और विचारधाराओं पर केंद्रित है। फुले-शाहू-आंबेडकर, अय्यंकाली, नारायण गुरु, त्रिवेणी संघ, अर्जक संघ, समाजवादी आंदोलन, पिछड़ा वर्ग आयोगों, मंडल आयोग और मंडल आंदोलन से होते हुए कांशीराम के बहुजन विचार तक। यह किताब दिखाती है कि जाति जनगणना कैसे ‘जात से जमात बनाने’ का बुनियादी ज़रिया है। जाति जनगणना ने बहुजन गोलबंदी, राजनीतिक चेतना और सामाजिक परिवर्तन का औज़ार बनी। शैली के स्तर पर यह किताब आम पाठकों के लिए लिखी गई है, मगर इसके भीतर मौजूद सवाल पूरी तरह अकादमिक हैं। ये किताब उन तमाम सवालों का जवाब देती है, जिनको लेकर या तो भ्रम की स्थितियाँ हैं या अज्ञानता की। इस किताब सबसे बड़ी खासियत है— जटिल सामाजिक और ऐतिहासिक विमर्श को सरल, प्रवाहपूर्ण और संवादात्मक भाषा में प्रस्तुत करना। जाति जनगणना दरअसल जाति की राजनीति, सामाजिक न्याय के वैचारिक संघर्ष और भारतीय लोकतंत्र की अधूरी परियोजना पर एक गंभीर, मगर पठनीय हस्तक्षेप है।

Dr. Laxman Yadav

डॉ. लक्ष्मण यादव अध्येता, जन बुद्धिजीवी व सामाजिक कार्यकर्ता है। वह भारतीय समाज की संघर्षधर्मी जनपक्षधर धाराओं को एक मंच पर लाने की कोशिश करते हैं। उनके लिए समाजवाद, आंबेडकरवाद, स्त्रीवाद और आदिवासियों के संघर्ष सामाजिक न्याय की एक वृहत्तर लड़ाई के अलग-अलग रंग है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के गोल्ड मेडलिस्ट रहे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से तुलसीदास विषयक आलोचना पर शोधकार्य किया। तक़रीबन डेढ़ दशक तक डीयू के ज़ाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज में अध्यापन किया। उनकी पिछली किताब प्रोफ़ेसर की डायरी हिंदी में सबसे तेज़ बिकने वाली बेस्टसेलर किताब रही है। यह उनकी अगली किताब है।
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