| Publisher |
HIND YUGM |
| Publication Year |
2024 |
| ISBN-13 |
9788119555321 |
| ISBN-10 |
8119555325 |
| Binding |
Paperback |
| Edition |
1st |
| Number of Pages |
176 Pages |
| Language |
(Hindi) |
| Subject |
Indian Writing |
वीगन होना क्या होता है? यह शाकाहारी होने से किस तरह से भिन्न है? क्या यह एक विदेशी विचार है जिसकी भारतीय-संस्कृति और परंपरा में कोई जड़ें नहीं हैं? क्या वीगनिज़्म लोगों पर अपने विचारों को थोपता है? जोक्विन फ़ीनिक्स, पामेला एंडरसन, युवाल नोआ हरारी, माइक टायसन, सेरेना विलियम्स आदि विश्व प्रसिद्ध हस्तियों ने क्यों वीगनिज़्म को अंगीकार किया है? इन तमाम प्रश्नों के जवाब आपको इस किताब में मिलेंगे। साथ ही मांसाहार और जीवहत्या के पक्ष में दिए जाने वाले तमाम कुतर्कों का समाधान भी इसमें वैज्ञानिक रीति से कर दिया गया है। यह पुस्तक वीगनवाद में निहित अध्यात्म, पारिस्थितिकी, नैतिकता और तर्कसंगति की भी विस्तार से व्याख्या करती है। भारत सहित पूरी दुनिया में निरंतरता से विकसित हो रहे वीगनिज़्म के कल्ट पर यह हिंदी में पहली प्रामाणिक पुस्तक है और इसे वीगनिज़्म में रुचि रखने वाले प्रश्नोत्तर-शैली की एक उपयोगी हैंडबुक की तरह भी पढ़ सकते हैं।
Sushobhit
13 अप्रैल 1982 को मध्यप्रदेश के झाबुआ में जन्म। शिक्षा-दीक्षा उज्जैन से। अँग्रेज़ी साहित्य में स्नातकोत्तर। कविता की दो पुस्तकों ‘मैं बनूँगा गुलमोहर’ और ‘मलयगिरि का प्रेत’ सहित लोकप्रिय फ़िल्म-गीतों पर विवेचना की एक पुस्तक ‘माया का मालकौंस’ प्रकाशित। यह चौथी किताब। अँग्रेज़ी के लोकप्रिय उपन्यासकार चेतन भगत की पाँच पुस्तकों का अनुवाद भी किया है।
संप्रति दैनिक भास्कर समूह की पत्रिका अहा! ज़िंदगी के सहायक संपादक।
Sushobhit
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