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| Publisher | Yuvaan Books |
| ISBN-13 | 9788169235624 |
| ISBN-10 | 8169235626 |
| Binding | Paperback |
| Edition | 2026 |
| Number of Pages | 168 Pages |
| Language | (Hindi) |
| Subject | Classic Fiction |
जयशंकर प्रसाद कहानियों की अपनी भाषा और शिल्प में शास्त्रीयतावादी मालूम पड़ते हैं। ऊपर से देखने पर उनकी संस्कृतनिष्ठ भाषा और राजा, नवाब और धनिकों की कहानियाँ ऐसा आभास देती भी हैं। ज़रा गहराई से देखें कि उनकी कहानियों के केन्द्रीय पात्र कौन ह? आपको मिलेगा कि बलूच और इरानी बंजारे, मुसहर, गुंडे, हाथ की सफाई दिखाने वाले, जलदस्यु, नगरवधुएँ और भूमिहीन- सताए हुए लोग उनकी कहानियों के नायक नायिकाएं हैं। इन कहानियों में उनका चरित्र उदात्त, क्षमाशील और कथित उच्च वर्ग की तुलना में कहीं अधिक मानवीय है। इसके उलट धनिक और राजे महाराजे कमज़ोर और छुद्र दिखाई देंगे। दूसरे अनेक कारणों के साथ यह तत्व भी जयशंकर प्रसाद की कहानियों को क्लासिक और भारतीय साहित्य की अमूल्य धरोहर बनाता है ।
Jayshankar Prasad
Yuvaan Books