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Gunda aur Anay Kahaniyaan | गुंडा तथा अन्य कहानियाँ

Author :

Jayshankar Prasad

Publisher:

Yuvaan Books

Rs179 Rs199 10% OFF

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Publisher

Yuvaan Books

ISBN-13

9788169235624

ISBN-10 8169235626
Binding

Paperback

Edition 2026
Number of Pages 168 Pages
Language (Hindi)
Subject

Classic Fiction

जयशंकर प्रसाद कहानियों की अपनी भाषा और शिल्प में शास्त्रीयतावादी मालूम पड़ते हैं। ऊपर से देखने पर उनकी संस्कृतनिष्ठ भाषा और राजा, नवाब और धनिकों की कहानियाँ ऐसा आभास देती भी हैं। ज़रा गहराई से देखें कि उनकी कहानियों के केन्द्रीय पात्र कौन ह? आपको मिलेगा कि बलूच और इरानी बंजारे, मुसहर, गुंडे, हाथ की सफाई दिखाने वाले, जलदस्यु, नगरवधुएँ और भूमिहीन- सताए हुए लोग उनकी कहानियों के नायक नायिकाएं हैं। इन कहानियों में उनका चरित्र उदात्त, क्षमाशील और कथित उच्च वर्ग की तुलना में कहीं अधिक मानवीय है। इसके उलट धनिक और राजे महाराजे कमज़ोर और छुद्र दिखाई देंगे। दूसरे अनेक कारणों के साथ यह तत्व भी जयशंकर प्रसाद की कहानियों को क्लासिक और भारतीय साहित्य की अमूल्य धरोहर बनाता है ।

Jayshankar Prasad

जन्म: 30 जनवरी 1890, वाराणसी (उ.प्र.)। स्कूली शिक्षा मात्र आठवीं कक्षा तक। तत्पश्चात् घर पर ही संस्कृत, अंग्रेजी, पालि और प्राकृत भाषाओं का अध्ययन। इसके बाद भारतीय इतिहास, संस्कृति, दर्शन, साहित्य और पुराण-कथाओं का एकनिष्ठ स्वाध्याय। पिता देवीप्रसाद तम्बाकू और सुँघनी का व्यवसाय करते थे और वाराणसी में इनका परिवार 'सुँघनी साहू’ के नाम से प्रसिद्ध था। पिता के साथ बचपन में ही अनेक ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों की यात्राएँ कीं। छायावादी कविता के चार प्रमुख उन्नायकों में से एक। एक महान लेखक के रूप में प्रख्यात। विविध रचनाओं के माध्यम से मानवीय करुणा और भारतीय मनीषा के अनेकानेक गौरवपूर्ण पक्षों का उद्घाटन। 48 वर्षों के छोटे-से जीवन में कविता, कहानी, नाटक, उपन्यास और आलोचनात्मक निबन्ध आदि विभिन्न विधाओं में रचनाएँ। प्रमुख रचनाएँ: झरना, आँसू, लहर, कामायनी (काव्य); स्कन्दगुप्त, अजातशत्रु, चन्द्रगुप्त, ध्रुवस्वामिनी, जनमेजय का नागयज्ञ, राज्यश्री (नाटक); छाया, प्रतिध्वनि, आकाशदीप, आँधी, इन्द्रजाल (कहानी-संग्रह); कंकाल, तितली, इरावती (उपन्यास)। 14 जनवरी, 1937 को वाराणसी में निधन
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