Availability: Available
Shipping-Time: Usually Ships 3-5 Days
0.0 / 5
| Publisher | HIND YUGM |
| Publication Year | 2026 |
| ISBN-13 | 9788119555000 |
| ISBN-10 | 8119555007 |
| Binding | Paperback |
| Number of Pages | 84 Pages |
| Language | (Hindi) |
| Dimensions (Cms) | 19.8 x 12.9 x 0.7 |
| Subject | Plays |
‘होली काउ का गोबर’ प्रतिष्ठित 'मोहन राकेश सम्मान 2009' से सम्मानित समकालीन हिंदी नाट्य लेखन की उत्कृष्ट कृति अब पुस्तक के रूप में पाठकों के सामने है। नाटककार और पत्रकार विवेक आसरी की यह कृति नाट्य विधा की पारंपरिक सीमाओं को तोड़ती है। इसकी पटकथा और संवाद इतने जीवंत और गतिशील हैं कि पाठक को उपन्यास पढ़ने जैसा रस आता है। इसके हर पृष्ठ पर एक गहरा नाटकीय रस है और हर संवाद में व्यवस्था को झकझोर देने वाली एक तीखी चुभन। साहित्य जगत के प्रतिष्ठित समीक्षकों द्वारा इस रचना को बेहद सराहा और प्रशंसित किया गया है। यह नाटक सीधे आपसे सवाल पूछता है और इसके तीखे जवाब आप अपने भीतर ख़ुद ढूँढ़ने लगते हैं।
इस विचलित कर देने वाले नाटक की कहानी कश्मीर में हुई एक कथित 'मुठभेड़' के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जिसमें भारतीय सेना के एक जाँबाज़ अधिकारी की जान चली गई। पत्रकार वाली पैनी नज़र और मानवीय संवेदनाओं के बेहतरीन तालमेल ने इस किताब को बेहद सजीव और प्रासंगिक बना दिया है। यह नाटक सत्ता और सिस्टम की जवाबदेही पर उठाया गया एक बड़ा सवालिया निशान है। रंगमंच के शौक़ीन, साहित्य-प्रेमी और समाज की वास्तविक परतों को गहराई से समझने की चाह रखने वाले हर पाठक के लिए यह किताब एक अनिवार्य दस्तावेज़ है।
Vivek Asri
HIND YUGM