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Jo Adhura Rah gaya

Author :

Vishakha Gaur

Publisher:

Pankti Prakashan

Rs224 Rs249 10% OFF

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Publisher

Pankti Prakashan

Publication Year 2026
ISBN-13

9788168557345

ISBN-10 8168557344
Binding

Paperback

Number of Pages 120 Pages
Language (Hindi)
Weight (grms) 118
Subject

Short Stories

कहानियाँ केवल वहीं नहीं होतीं, जो हम जानते हैं, जिन पर यक़ीन करते हैं या जिन्हें जीते हैं। कहानियाँ वे भी होती हैं जो हमारे सपनों में हैं, जिनके पूरे हो जाने की हम कामना करते हैं; और वे भी, जो हमारे डर में हैं, जिनके सच हो जाने का भय हमें लगातार डराए रखता है। आज से कल तक पहुँचने के इस सफ़र में न जाने कितनी कहानियाँ पूरी हो जाती हैं। इस किताब को लिखने से पहले मेरी अपनी एक अलग कहानी थी, और आज इस किताब को पूरा कर पाना भी मेरी एक नई कहानी है। मैंने किरदारों को पन्नों पर जिंदा करते हुए जाना कि वे पन्नों पर जिंदा तो हो सकते हैं, पर तब तक जी नहीं सकते, जब तक आप उनमें स्वयं को न खोज लें, अपने भावों से उन्हें साँसें न दे दें। मैं इन कहानियों में इन किरदारों को केवल जिंदा कर पाई हैं; उन्हें साँस देकर जीना सिखाना अब आपके हाथों में है। ~ विशाखा गौड

Vishakha Gaur

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