Kaali Bakasiya । काली बकसिया (Hindi)

Author:

Abha Srivastava

Publisher:

Hindi Yugam

Rs120 Rs150 20% OFF

Availability: Available

Publisher

Hindi Yugam

Publication Year 2020
ISBN-13

9789387464971

ISBN-10 9387464970
Binding

Paper Back

Edition First
Number of Pages 120 Pages
Language (Hindi)
Dimensions (Cms) 19.8 x 0.8 x 12.9
Weight (grms) 152

कहानियाँ खोजी नहीं जातीं, गढ़ी नहीं जातीं, वे तो हमारे-आपके रोजमर्रा के जीवन के आस-पास बिखरी रहती हैं। उन्हें तिनका-तिनका बटोरना पड़ता है, समेट-सहेजकर एक अनुबंध करना पड़ता है उनके साथ ताकि लेखक और पाठक दोनों के साथ वे आत्मा की गहराइयों तक घुल-मिल सकें। मैंने ये कहानियाँ शायद इसलिए लिखीं क्योंकि जीवन के हर पड़ाव, हर मोड़ पर मुझे कई तरह के कड़वे-मीठे अनुभवों ने झकझोरा है। उन्हें व्यक्त कर देने की व्याकुलता ने ही मुझे लेखन की प्रेरणा दी। समय के साथ स्मृतियाँ धुँधली पड़ती जाती हैं परंतु लेखनी के माध्यम से मैंने इन्हें सहेजने का एक प्रयास मात्र किया है। कहानियाँ अनुभव से ज़रूर बटोरी गई हैं किंतु उनमें कल्पना का तड़का भी लगा है। अलकनंदा उर्फ़ नंदी का ब्याह मेरी एक दूर की रिश्तेदार ने करवाया था। छोटी दुल्हन आज भी एक मठ में सिद्ध संन्यासिनी है। कुछ बरस पहले उससे मिलना हुआ था। ‘तर्पण’ कहानी का अक्षर-अक्षर सत्य है। ऐसे भी परिवार होते हैं। ‘दिद्दा’ कहानी के माध्यम से गोरखपुर के अपने पैतृक घर को, जो अब बिक चुका है, को पुनः स्मरण किया है। ‘काली बकसिया’ आज भी मेरे पास सुरक्षित है। नंदिनी सक्सेना की बेटी निफ्ट, मुंबई की ग्रेजुएट थी। हर कहानी लिखते समय मन बार-बार व्यथित हुआ। कई-कई बार आँखें भीगीं लेकिन जब कहानी पूरी हुई तो हृदय पर मानो एक शीतल लेप-सा लग गया। संकलन आपके सामने है, आलोचना भी आप ही करेंगे और प्रशंसा भी। यदि किसी कहानी ने आपके मर्म को छुआ हो तो में स्वयं को धन्य मानूँगी।.

Abha Srivastava

लखनऊ विश्वविद्यालय से एम.ए. (दर्शनशास्त्र) तथा बैचलर ऑफ़ लाइब्रेरी साइंस की डिग्री। साहित्य के प्रति रुझान के चलते बाल्यावस्था से ही लेखन और पठन-पाठन में रुचि। मात्र 10 वर्ष की आयु में बाल कविता ‘यदि मैं नन्ही चिड़िया बन जाती’ का समाचार-पत्र ‘स्वतंत्र भारत’ में प्रकाशन और यहीं से लेखन यात्रा का आरंभ। अपनी लेखनी से अब तक देश के प्रमुख पत्र यथा ‘नवभारत टाइम्स’, ‘जनसत्ता’, ‘हिंदुस्तान’, ‘आज’, सहारा, मॉरीशस से प्रकाशित बाल पत्रिका ‘रिमझिम’ सहित देश की प्रमुख बाल पत्रिकाओं ‘नंदन’, ‘चंपक’, ‘बाल भारती’, ‘बालहंस’, ‘बाल वाणी’ में सशक्त पहचान। एक बाल काव्य-संकलन सहित अब तक 500 से अधिक बाल रचनाएँ प्रकाशित। ‘सरिता’, ‘गृहशोभा’, ‘कादम्बिनी’, ‘वामा’, ‘जागरण सखी’, ‘निकट’ (दुबई), ‘आजकल’, ‘समरलोक’— पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन। लोकप्रिय मासिक पत्रिका ‘वनिता’ में सन् 2006 से नियमित लेखन। अब तक 40 कहानियाँ, 10 से अधिक कविताएँ तथा दो धारावाहिक प्रकाशित। आकाशवाणी लखनऊ तथा लखनऊ दूरदर्शन से भी कहानी एवं कविताओं का प्रसारण। कुशल गृहिणी, अच्छी माँ एवं पत्नी की भूमिका में सफल। लेखन के बाद बागवानी सबसे ज्यादा प्रिय।