Kadambari Devi Ka Suicide Note (Hindi)

Author :

Ranjan bandyopadhyay

,

Shubhra Upadhyaya

Publisher:

Rajkamal Prakashan

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Publisher

Rajkamal Prakashan

Publication Year 2022
ISBN-13

9789394902213

ISBN-10 939490221X
Binding

Paperback

Edition 1st
Number of Pages 127 Pages
Language (Hindi)
Dimensions (Cms) 19.5X13X1
Weight (grms) 136
Subject

Classic Fiction

‘कादम्बरी देवी का सुसाइड नोट’ विश्वकवि रवीन्द्रनाथ ठाकुर की भाभी के त्रासद जीवन की मार्मिक कथा है। महज पचीस वर्ष की उम्र में कादम्बरी ने आत्महत्या कर ली थी। बंगाल के विख्यात ठाकुर घराने में यह दुर्घटना तेईस वर्षीय रवीन्द्रनाथ के विवाह के मात्र चार महीने बाद घटी। क्या रवीन्द्रनाथ के विवाह ने उन दोनों के बीच के किसी सूत्र को छिन्न-भिन्न कर दिया था, जिसके बाद कादम्बरी का जीवित रहना असम्भव हो गया? फिर इसमें ऐसा क्या था कि ठाकुर घराने के मुखिया, महर्षि देवेन्द्रनाथ ने अपनी बहू की आत्महत्या के एक-एक साक्ष्य को नष्ट करा देना अपरिहार्य समझा? कादम्बरी की मृत्यु के सवा सौ साल से भी अधिक समय बाद प्रकाशित यह उपन्यास ऐसे तमाम प्रश्नों के उत्तर देता है। वस्तुत: यह ऐसी कृति है जो उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध की एक घटना के बहाने बांग्ला नवजागरण के अन्तर्विरोधों को जबरदस्त ढंग से उजागर करती है...अत्यन्त विवादित और उतना ही लोकप्रिय उपन्यास!

Ranjan bandyopadhyay

रंजन बंद्योपाध्याय,महत्त्वपूर्ण बांग्ला उपन्यासकार रंजन बंद्योपाध्याय का जन्म 15 सितम्बर, 1941 को हुआ। कोलकाता के स्कॉटिश चर्च कॉलेज में अंग्रेज़ी भाषा और साहित्य के व्याख्याता के रूप में उन्होंने अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत की। सोलह साल तक अध्यापन करने के बाद 1980 के दशक में पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा और ‘आजकल’ अखबार में सह-सम्पादक बने। इसके बाद ‘आनन्द बाजार’ और ‘संवाद प्रतिदिन’ में भी सह-सम्पादक रहे। उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—‘कादम्बरी देवीर सुसाइड-नोट’, ‘आमि रवि ठाकुरेर बोउ’, ‘पुरोनो सेई पूजोर कथा’, ‘रवि ओ रानूर आदरेर दाग’, ‘प्राणसखा विवेकानन्द’, ‘प्लाता नदीर धारे’, ‘रस’, ‘मणिकांचन’, ‘म प्रियोतमासु’, ‘नष्ट पुरुष शरतचन्द्र’ आदि।

Shubhra Upadhyaya

शुभ्रा उपाध्याय,हिन्दी-बांग्ला की सुपरिचित लेखक और अनुवादक शुभ्रा उपाध्याय का जन्म 19 फरवरी, 1970 को हुआ। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से एम.ए., पी-एच.डी. की डिग्री ली है। उनकी प्रकाशित कृतियाँ हैं—‘अन्तराल’, ‘कतरा-कतरा जिन्दगी’ (कहानी-संग्रह); ‘समानान्तर चलती एक लड़की’ (कविता-संग्रह); ‘अज्ञेय की कहानियों का पुनर्पाठ’, ‘अपने-अपने अज्ञेय’ (सम्पादित)।सम्प्रति : वे खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज, कोलकाता में एसोसिएट प्रोफेसर हैं।
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