| Publisher |
Radhakrishna Prakashan |
| Publication Year |
2000 |
| ISBN-13 |
9788171196135 |
| ISBN-10 |
8171196136 |
| Binding |
Hardcover |
| Number of Pages |
186 Pages |
| Language |
(Hindi) |
| Dimensions (Cms) |
22.5 X 14.5 X 1.5 |
आयुर्वेद और योग का विस्तार आज विश्व भर में हो रहा है। आयुर्वेद और योग वह ज्ञान और विज्ञान है जिसका जीवन के साथ सम्बन्ध है। यह पुस्तक आयुर्वेद, योग और ध्यान के तत्त्वों से रची परम्परागत भारतीय स्वास्थ्य चेतना को समकालीन जीवन की दिनोंदिन जटिल होती जा रही शैली से जोड़ने का अनूठा प्रयास है। इस पुस्तक से आप अपने को भोज्य पदार्थों और मसालों से संतुलित करने की प्रविधियां भी जानेंगे।
डॉ. विनोद वर्मा के वर्षों के शोध और परिश्रम का निष्कर्ष यह पुस्तक स्वास्थ्य की
देख-भाल के लिए निरोधी उपायों और दूसरे स्वावलंबी तरीकों के विषय में सम्पूर्ण जानकारी देती है। लेखिका की विदेशों में आयुर्वेद शिक्षा, आयुर्वेद और योग का गहन अध्ययन तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर उनका अनुसंधान और अनुभव इस पुस्तक को महत्त्वपूर्ण कृति बनाते हैं।
Vinod Verma
डॉ. वर्मा का जन्म और पालन-पोषण एक ऐसे परिवार में हुआ जिसके हर रोज के क्रियाकलाप में ‘योग’ और ‘आयुर्वेद’ की बड़ी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने अपने पिता से यौगिक प्रक्रियाओं की शिक्षा प्राप्त की और अपनी दादी माँ द्वारा उनके जीवन में आयुर्वेद का आत्मसात् हुआ। डॉ. वर्मा की दादी माँ को स्त्रियों और बच्चों के उपचार की स्वाभाविक योग्यता प्राप्त थी। पारिवारिक परंपरा के बावजूद डॉ. वर्मा ने आधुनिक चिकित्साशास्त्र के अध्ययन का निश्चय किया और डॉक्टर की दो उपाधियाँ अर्जित कीं—पंजाब विश्वविद्यालय से प्रजनन जीव विज्ञान—(Reproduction Biology) में और पेरिस की Universite de Pierre et Marie Curie से तंत्रिका जीव विज्ञान (Neurobiology) में। तंत्रिका जीव विज्ञान के क्षेत्र में डॉ. वर्मा ने उन्नतिशील शोधकार्य किया—पहले National Institute of Health, Bethesda (USA) में और फिर Max-Planck Institute, Germany में। जर्मनी की एक औषधीय कंपनी में चिकित्सा संबंधी शोध के दौरान डॉ. वर्मा ने स्पष्ट अनुभव किया कि निरोग अवधान संबंधी नवीनतम दृष्टिकोण विखंडित है, फिर भी हम लोग स्वास्थ्य-संपोषण को छोडक़र केवल बीमारियों के इलाज पर ही अपने सारे साधन और प्रयास लगाये जा रहे हैं। इस उद्देश्य के लिए डॉ. वर्मा ने Now (The New Way Health Organization) की स्थापना की ताकि इसके द्वारा वह स्वास्थ्यप्रद पवित्र जीवन-शैली, स्वास्थ्य की देखभाल के लिए निरोधी उपायों और दूसरे स्वावलंबी तरीकों के विषय में जानकारी लोगों तक पहुँचा सकें। पिछले कई वर्षों से डॉ. वर्मा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के आचार्य प्रियव्रत शर्मा के साथ प्राचीन गुरु-शिष्य परंपरा के अनुसार आयुर्वेदिक ग्रंथों का अध्ययन कर रही हैं। इसके अलावा वह मानव जातीय और लोक-साहित्यिक आयुर्वेदिक परंपरा के क्षेत्रा में शोध करती रही हैं ताकि साधारण आयुर्वेदिक उपचार के घरेलू नुस्खों का पता लगाया जा सके। डॉ. वर्मा के अनेक वैज्ञानिक शोध-लेख अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। आयुर्वेद एवं योग आदि पर उनके पाँच ग्रंथ भी विभिन्न यूरोपीय भाषाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। डॉ. वर्मा हर वर्ष कुछ महीने विदेश में बिताती हैं जहाँ आयुर्वेद और योग द्वारा स्वास्थ्य तथा दीर्घायु जैसे विषयों पर उनके भाषण, कार्य-शिविर तथा अन्य कार्यक्रम अत्यंत लोकप्रिय हैं।
Vinod Verma
Radhakrishna Prakashan