Khuli Aankh Aur Anya Kavitayen

Author :

Udayan Vajpeyi

Publisher:

Rajkamal Prakashan

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Publisher

Rajkamal Prakashan

Publication Year 2023
ISBN-13

9788119835393

ISBN-10 8119835395
Binding

Paperback

Number of Pages 168 Pages
Language (Hindi)
Dimensions (Cms) 22 X 14 X 1
Subject

Poetry

गणित के किसी प्रश्न को हल करने पर मन में जो रसमय शिथिलता आती है या प्रेम कर लेने के बाद जो रसमय थकान हम पर छा जाती है—जो रस के अनुभव के आगे है और इसलिए रस से जुड़ी हुई है, उसका विस्तार या बढ़त है, उदयन वाजपेयी की कविता इन्हीं अनुभवों की कविता है। हम कविता में भारतीय आधुनिकता की बात करते आए हैं किन्तु पाश्चात्य आधुनिकता के प्रभाव को ही भारतीय कविता की आधुनिकता बता देते हैं। उदयन की कविताएँ भारतीय कविता की शताब्दियों पुरानी परम्परा का विकास है, यह हमारी अपनी आधुनिकता है। यदि हमारे इतिहास में औपनिवेशिक विदारण (colonial rupture) न होता तो कविता कहाँ पहुँचती उदयन की कविता उसका प्रतिमान स्थापित करती है। इतिहास बदला भी जाता है और समय से बचकर नहीं बल्कि समय से जूझकर बदला जाता और कविता समय से अपने ढंग से जूझती है। जूझने का उसका ढंग क्या होता है इस संग्रह को पढ़कर जाना जा सकता है। यहाँ ‘छन्द एक फाँस की तरह मेरी/अंगुलियों में गड़ा है, रह रह कर/ टीस उठ रही है’, जूझने की यह भूमि लिखना चाहने और लिख पाने के मध्य है। जैसे हीगल के अनुसार वृक्ष तब तक सुन्दर नहीं हो जाता जब तक कि द्रष्टा उसे अपनी मनोदशा में रंगकर बाहर नहीं रख देता उसी तरह यहाँ कवि ने पूरे संसार को रंग से भरी हुई अपने मन की बाल्टी में डुबाकर पुनः बाहर रख दिया है। संसार में आकर जो नाटक हमें गड्डमड्ड (chaotic) दिखायी देता है वहाँ ये कविताएँ किसी अभिनेत्री की भाँति अपने आने की बारी की धीरज से प्रतीक्षा करती हैं और अपने एस्थेटिक अनुभव से उसे एक तारतम्य तो देती हैं मगर उसके गड्डमड्ड-पन को भी वैसा का वैसा रखती हैं। जो संसार में होने वाली हिंसा और मंच पर होने वाले युद्ध में सौन्दर्य का, कविता का फ़र्क है, कवि यहाँ उसी के संधान में जुटा है। अशुद्ध होने पर ही हमें भाषा का अनुभव होता है अन्यथा वह नेपथ्य में हमारे लिए निरन्तर काम किये जाती है। कविता ही एकमात्र ऐसी विधा है जहाँ भाषा हमें सशरीर अनुभव होती है, हम उसके शरीर को अपनी प्रेयसी के शरीर की तरह अनुभव कर सकते हैं। उदयन की कविता में भाषा की यह सशरीर उपस्थिति किसी आकस्मिक परिघटना से कहीं अधिक है। उसकी आठों पुरियाँ जागरित हैं। साहित्य में हठात्दृष्ट (epiphany), सहसा दिख या अनुभव होनेवाले इलहामों पर तो बहुत विचार है लेकिन एक हठात्दृष्ट और होता है। यहाँ हठात् योगियों के हठ से आया है। जब कवि रसातल पर या मानो किसी सूनी दीवार पर ध्यान लगाता है और प्रतीक्षा करता है रसातल पलटकर देखे, यहाँ कविता अनायास प्रकट न होकर तप से प्रकट होती है। यह कविताएँ तपस्पूत मानस की कविताएँ हैं। जीवन की, संसार की कामनाएँ इसे बढ़ाए चली जाती हैं इसलिए इसके सहस्रों चक्षु हैं और जितना यह बाहर देखती है उतना भीतर भी, जितना यह दूसरे को देखती है उतना खुद को भी। आँख केवल बाहर ही नहीं खुलती भीतर भी खुलती है, कमल सरोवर के बाहर ही खिलता यदि प्रकाश हो तो कहीं अधिक कोमल कहीं अधिक सुन्दर और सुगन्धित कमल जल के भीतर भी खिलता है।

Udayan Vajpeyi

उदयन वाजपेयी,जन्म : 4 जनवरी, 1960; सागर, मध्य प्रदेश प्रकाशित पुस्तकें : ‘कुछ वाक्य’, ‘पागल गणितज्ञ की कविताएँ’, ‘केवल कुछ वाक्‍य’ (कविता-संग्रह); ‘सुदेशना’, ‘दूर देश की गन्ध’, ‘सातवाँ बटन’, ‘घुड़सवार’ (कहानी-संग्रह); ‘चरखे पर बढ़त’, ‘जनगढ़ क़लम’, ‘पतझर के पाँव की मेंहदी’ (निबन्ध और यात्रा वृत्तान्त); ‘अभेद आकाश’ ( फ़िल्मकार मणि कौल); ‘मति, स्मृति और प्रज्ञा’ (इतिहासकार धर्मपाल), ‘उपन्‍यास का सफ़रनामा’ (शम्‍सुर्रहमान फ़ारूक़ी), ‘विचरण(दार्शनिक नवज्‍योत सिंह), ‘कवि का मार्ग’ (कवि कमलेश), ‘भव्‍यता का रंग-कर्म’ (रंग-निर्देशक रतन थियाम), ‘प्रवास और प्रवास’ (उपन्‍यासकार कृष्‍ण बलदेव वैद); का.ना. पणिक्कर पर ‘थियेटर ऑफ़ रस’ और रतन थियाम पर ‘थियेटर ऑफ ग्रेंजर’; वी आँविजि़ब्ल (फ्रांसीसी में कविताओं के अनुवाद की पुस्तक); ‘मटमैली स्मृति में प्रशान्त समुद्र’ (जापानी कवि शुन्तारो तानीकावा के हिन्दी में अनुवाद); कविताओं, कहानियों और निबन्धों के अनुवाद तमिल, बांग्‍ला, ओड़िया, मलयालम, मराठी, अंग्रेज़ी, फ्राँसीसी, स्वीडिश, पोलिश, इतालवी, बुल्गारियन आदि भाषाओं में। ‘समास’ का सम्‍पादन। कुमार शहानी की फ़िल्म 'चार अध्याय' और 'विरह भर्यो घर-आँगन कोने में' का लेखन। कावालम नारायण पणिक्कर की रंगमंडली 'सोपानम्' के लिए ‘उत्तररामचरितम्’, ‘अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ की हिन्दी में पुनर्रचना, पणिक्कर के साथ कालिदास के तीनों नाटकों के आधार पर ‘संगमणियम्’ नाटक का लेखन। 2000 में लेविनी (स्वीट्ज़रलैंड) में और 2002 से पेरिस (फ्रांस) में 'राइटर इन रेसिडेंस', 2011 में नान्त (फ्रांस) में अध्येता के रूप आमंत्रित। मई 2003 में फ्रांस के राष्ट्रीय पुस्तकालय में भारतीय कवि की हैसियत से व्याख्यान। वाराणसी, भुवनेश्वर, पटना, मुम्बई, दिल्ली, पेरिस, मॉस्को, जिनिवा, काठमांडू आदि स्थानों पर कला, साहित्य, सिनेमा, लोकतंत्र आदि विषयों पर व्याख्यान। रज़ा फ़ाउंडेशन’, ‘कृष्ण बलदेव वैद पुरस्कार’ और ‘स्‍पंदन कृति सम्‍मान’ से सम्मानित। गाँधी चिकित्सा महाविद्यालय, भोपाल में अध्यापन
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