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| Publisher | Unbound Script |
| ISBN-13 | 9788169235228 |
| ISBN-10 | 8169235227 |
| Binding | Paperback |
| Edition | 2026 |
| Number of Pages | 184 Pages |
| Language | (Hindi) |
| Subject | Essays |
मुम्बई लोकल, उस महानगर की जीवन रेखा है। ट्रेन के भीड़ भरे डिब्बों के भीतर जैसे कई संसार पटरियों पर फिसलते हैं, स्टेशनों पर विराम लेते हैं और कभी थके हुए, कभी ख़ुशी भरे क़दमों से घर लौटते हैं। लोकल की यात्राएं बहुत लम्बी नहीं होतीं। थोड़े ही समय की इन यात्राओं के दौरान, टूटने-बिखरने, प्यार, हिंसा और करुणा के दृश्य और छोटे लेकिन ज़रूरी सबक मिलते-दिखते रहते हैं। रेखा सुथार ने पहियों पर चलती इस ज़िन्दगी को बड़ी शिद्दत से महसूस किया है और एक सहज भाषा में दर्ज किया है। जेबकतरे हों या मोची, किशोर प्रेमी जोड़े हों या किन्नर, बूढ़े - बूढ़ियाँ हों या थके हुए सेल्समैन; रेखा इन्हें बगैर पूर्वग्रह के और बड़ी सहृदयता से दर्ज करती हैं। यह भी इन कथाओं की ताक़त है।
Rekha Suthar
Unbound Script