Main Aur Mera Man

Author :

Uma Jhunjhunwala

Publisher:

Vani Prakashan

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Publisher

Vani Prakashan

Publication Year 2026
ISBN-13

9789369448081

ISBN-10 936944808X
Binding

Paperback

Number of Pages 158 Pages
Language (Hindi)
Weight (grms) 200

मैं और मेरा मन उमा झुनझुनवाला एक कर्मठ, निष्ठावान और रंगकर्म के लिए एक प्रतिबद्ध रंगकर्मी हैं। एक ऐसा व्यक्तित्व जिसमें अभिनय, निर्देशन और लेखन एक साथ समाहित हैं। पिछले तीस वर्षों से भी अधिक समय से वे रंगकर्म से सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं। अज़हर आलम के साथ मिलकर उन्होंने लिटिल थेस्पियन की स्थापना की थी। अज़हर आलम ने कुछ जल्दी ही दुनिया को अलविदा कह दी और अब उमा अपने बच्चों के साथ ही लिटिल थेस्पियन और रंगरस को देख रही हैं। न केवल देख रही हैं बल्कि नई बुलंदियों को छू रही हैं। वे एक ऐसी समर्पित नाटककार, कवि और संपादक हैं, जिन्होंने कई पीढ़ियों को रंगकर्म के लिए तैयार कर दिया है और यह प्रक्रिया आज भी जारी है। अब तक उनके कई नाटक और कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। मैं और मेरा मन उनका दूसरा कविता-संग्रह है। मैं और मेरा मन की कविताओं में संवेदना का तत्व का सर्वाधिक प्रबल है। जैसे ही विचार को संवेदना का संस्पर्श मिलता है। शब्द कविता में ढलते चले आते हैं। उमा की कविताएँ यही काम करती हैं। संग्रह की पहली ही कविता ‘एक वृक्ष आस का, विश्वास का’ की शुरुआती पंक्तियाँ ‘एक अच्छे पल के इंतज़ार में/ गुज़ार देते हैं हम कई-कई पल/हमारी इसी क्रिया में/कुछ अच्छा हो जाने की संभावनाएँ बची रहती हैं’ हमें पकड़ लेती हैं और पूरा संग्रह के पढ़ने के लिए तैयार कर देती हैं। या- ‘फिर सुनो साथी, अहसासों की धूप हर कोने के अन्तस को गरमा देती है।‘ उमा की यह कविताएँ आत्मगत कविताएँ हैं जो अंतर्मन की यात्रा करते हुए बहुत बार बहिर्जगत में विस्तार पाती हैं। दृश्यात्मकता इन कविताओं का मूल तत्व है। संवेदना को दृश्य में बदलना अपेक्षाकृत कठिन कविता-कर्म है लेकिन उमा के रंगधर्मी अनुभव इन कविताओं में यथोचित प्रतीकों और बिंबों का इस्तेमाल कविता के स्व को पाठक का स्व बना देती हैं। मैं और मेरा मन। ‘मैं’ यानी उमा का स्वत्व, उसका स्वाभिमान या कहें कि अहम ‘और मेरा मन’ यानी उमा के मन के कई-कई परतें खोलती हैं यह कविताएँ। एक ओर अज़हर के साथ विवाह से पूर्व और विवाह के बाद प्रेम का रिश्ता, रंगकर्म का विशद संसार, नाटकों के विविध आयाम उमा को एक जीवन-दृष्टि देते हैं और वह विचार, संवेदना, आशा, निराशा, खुशी और विशाद के अनेक छोरों के साथ जूझती हुईं अपने कविता संसार को विस्तार देती हैं। इन कविताओं से गुज़रते हुए बहुत सारे अनुभव हमें अपने-अपने निजी अनुभवों के साथ ही जोड़ देते हैं। इसीलिए यह कविताएँ उमा की होते हुए भी आपको कहीं न कहीं अपने से जुड़ी हुई लगेंगी।   प्रताप सहगल

Uma Jhunjhunwala

उमा झुनझुनवाला जन्म : 20 अगस्त, 1968, कोलकाता शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी) बी.एड. • नाट्य क्षेत्र में सन् 1984 से सक्रिय। • देश की प्रसिद्ध नाट्य-संस्था लिटिल थेस्पियन की संस्थापक/निर्देशिका • अब तक 30 नाटकों, 48 कहानियों, 12 एकांकियों तथा 8 बाल-नाटकों का निर्देशन • 50 से ज़्यादा नाटकों में अभिनय। रचनाएँ : रेंगती परछाइयाँ, विसर्जन, भीगी औरतें और लम्हों की मुलाक़ात, हज़ारों ख़्वाहिशें एवं चौखट (नाटक), हमारे हिस्से की धूप कहाँ है एवं अन्य एकांकी (एकांकी-संग्रह), एक औरत की डायरी से (डायरी संकलन), लाल फूल का एक जोड़ा (कहानी-संग्रह), मैं अभी प्रतीक्षा में हूँ, आधे चाँद की थकी पुतलियाँ (काव्य-संग्रह)। नाट्य अनुवाद : उर्दू से हिन्दी : यादों के बुझे हुए सवेरे, लैला-मजनूं (इस्माइल चुनारा), आबनूसी ख़्याल (एन रशीद खान); अंग्रेज़ी से हिन्दी : एक टूटी हुई कुर्सी एवं अन्य नाटक (इस्माइल चुनारा के 4 नाटक), धोखा (राहुल वर्मा के ‘Truth & Treason’ से), बलकान की औरतें (जुलेस तास्का के ‘The Balkan Women’ से) तथा एंडगेम (सैमुएल बेकेट के ‘End Game’ से); बंगला से हिन्दी : मुक्तधारा (रवीन्द्रनाथ टैगोर), गोत्रहीन (रुद्रप्रसाद सेनगुप्ता), अलका (मनोज मित्र के अलोका नोनदेर पुत्रो कोन्या), मीरजाफर (ब्रात्य बासु), विभाजन (अभिजीत कारगुप्ता), अग्निपथ (मैनक सेनगुप्ता), सम्राट (काजल चौधरी)। रंगमंच के क्षेत्र में निरन्तर और उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए ‘राष्ट्रीय रंग-सम्मान’, ‘नाट्य शिरोमणि सम्मान’, ‘संस्कृति और साहित्य सम्मान’, ‘अनन्या सम्मान’, ‘सन्तश्री नाट्य अलंकरण’ सम्मान आदि।
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