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Mokshawan

Author :

Bhagwandas Morwal

Publisher:

Rajkamal Prakashan

Rs596 Rs795 25% OFF

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Publisher

Rajkamal Prakashan

Publication Year 2023
ISBN-13

9789395737890

ISBN-10 9395737891
Binding

Hardcover

Number of Pages 312 Pages
Language (Hindi)
Dimensions (Cms) 22 X 14 X 1.5
Subject

Novel

वृन्दावन को कृष्ण की क्रीड़ा-स्थली के रूप में जाना जाता है। श्रद्धा, भक्ति और समर्पण का यह केन्द्र वर्षों से न सिर्फ़ भारत बल्कि दुनिया-भर के कृष्ण-प्रेमियों को आकर्षित करता आ रहा है। लेकिन इस धार्मिक नगरी का एक पक्ष और है—यहाँ रहनेवाली विधवाएँ और उनका त्रासद जीवन। देश-भर से वे स्त्रियाँ जिन्हें विधवा हो जाने के बाद अपने घर या ससुराल, कहीं भी ठिकाना नहीं मिलता, वे वृन्दावन चली आती हैं। वे चाहे जिस आयु की हों। प्रतिष्ठित कथाकार और अपने हर उपन्यास के लिए व्यापक अध्ययन करनेवाले भगवानदास मोरवाल ने ‘मोक्षवन’ में इसी विषय को उठाया है। इसके लिए उन्होंने वृन्दावन में काफ़ी समय भी बिताया और सम्बन्धित सामग्री की खोज-बीन की। इस कथाकृति में आज के वृन्दावन, उसके मन्दिरों, परम्पराओं, गलियों-मुहल्लों, देवस्थानों आदि का एक विराट दृश्य रचते हुए, वे विधवाओं के दैनिक दुखों, जीवन-चर्या, वृन्दावन के धािर्मक वातावरण में उनकी दृश्यता का एक प्रामाणिक और मार्मिक चित्र प्रस्तुत करते हैं। कहानी कोलकाता से आई युवा विधवा हरिदासी की है, जो मोक्ष की इस यात्रा में अत्यन्त दुख सहन करते हुए अन्तत: संसार को विदा कह देती है और भारतीय संस्कृति से जुड़े कई ऐसे सवालों को उठा जाती है जिन पर हमारा समाज अकसर मौन रहता है। वृंदावन के साथ-साथ इस उपन्यास में बंगाल की लाल सौंधी मिट्टी की महक और कपास के सफ़ेद फूलों की कोमल बेचैनी भी रह-रहकर पाठक को उद्वेलित करती है।

Bhagwandas Morwal

जन्म: 23 जनवरी, 1960 नगीना, जिला-मेवात (हरियाणा)। शिक्षा: एम.ए. (हिन्दी) एवं पत्रकारिता में डिप्लोमा। प्रकाशित कृतियाँ: काला पहाड़ (1999), बाबल तेरा देस में (2004), रेत (2008) उर्दू में अनुवाद, नरक मसीहा (2014) मराठी में अनुवाद, हलाला (2015) उर्दू व अंग्रेजी में अनुवाद, सुर बंजारन (2017), वंचना (2019) तथा शकुंतिका (2020) (उपन्यास); सिला हुआ आदमी (1986), सूर्यास्त से पहले (1990), अस्सी मॉडल उर्फ़ सूबेदार (1994), सीढ़ियाँ, माँ और उसका देवता (2008), लक्ष्मण-रेखा (2010), दस प्रतिनिधि कहानियाँ (2014) (कहानी-संग्रह); पकी जेठ का गुलमोहर (2016) (स्मृति-कथा); लेखक का मन (2017) (वैचारिकी); दोपहरी चुप है (1990) (कविता); बच्चों के लिए कलयुगी पंचायत (1997) एवं अन्य दो पुस्तकों का सम्पादन। सम्मान: वनमाली कथा सम्मान (2019), भोपाल; स्पंदन पुरस्कार (2017), भोपाल; श्रवण सहाय एवार्ड (2012); जनकवि मेहरसिंह सम्मान (2010), हरियाणा साहित्य अकादमी; अन्तरराष्ट्रीय इंदु शर्मा कथा सम्मान (2009), लन्दन; शब्द साधक ज्यूरी सम्मान (2009); कथाक्रम सम्मान (2006), लखनऊ; साहित्यकार सम्मान (2004), हिन्दी अकादमी, दिल्ली सरकार; साहित्यिक कृति सम्मान (1994), हिन्दी अकादमी, दिल्ली सरकार; साहित्यिक कृति सम्मान (1999), हिन्दी अकादमी, दिल्ली सरकार; पूर्व राष्ट्रपति श्री आर. वेंकटरमण द्वारा मद्रास का राजाजी सम्मान (1995); डॉ. अम्बेडकर सम्मान (1985), भारतीय दलित साहित्य अकादमी; पत्रकारिता के लिए प्रभादत्त मेमोरियल एवार्ड(1985) तथा शोभना एवार्ड (1984)। जनवरी 2008 में ट्यूरिन (इटली) में आयोजित भारतीय लेखक सम्मेलन में शिरकत। पूर्व सदस्य, हिन्दी अकादमी, दिल्ली सरकार एवं हरियाणा साहित्य अकादमी।
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