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| Publisher | Yuvaan Books |
| ISBN-13 | 9789347125010 |
| ISBN-10 | 9347125016 |
| Binding | Paperback |
| Edition | 2026 |
| Number of Pages | 232 Pages |
| Language | (Hindi) |
| Subject | Philosophy |
अकारण ही मार्क्सवाद को एक पुरानी और स्थिर अवधारणा मान लिया गया है। इक्कीसवीं सदी में दुनिया के अनेक हिस्सों में इसपर पुनर्विचार करने की शुरुआत हुई है। यह पुस्तक स्त्रीवाद, लोकतंत्र, पर्यावरण, डेटा और इंटरनेट क्रांति, दलित और अन्य अस्तित्वमूलक प्रश्नों पर मार्क्सवादी नज़रिये से विचार करने की प्रेरणा देती है। इसके लिये यह विभिन्न नई किताबों और शोध - दृष्टियों का विश्वसनीय संदर्भ देती चलती है। यह किताब इस दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण है कि यह मार्क्सवाद के इतिहास और मार्क्स के जीवन का भी पुनरावलोकन करती है। इसकी विषयवस्तु इसे मार्क्सवाद के शोधार्थियों, जनांदोलनों, मार्क्सवाद की आलोचना करने और उससे सायास दूरी बनाए रखने वाले पाठकों के लिये समान रूप से पठनीय और उपयोगी बनाती है।
Gopal Pradhan
Yuvaan Books