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Next Savreen Shabri (Hindi)

Author :

Dr. Vishnudev Sharma

Publisher:

SARVATRA

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Publisher

SARVATRA

Publication Year 2025
ISBN-13

9789355439697

ISBN-10 9355439695
Binding

Paperback

Number of Pages 214 Pages
Language (Hindi)
Dimensions (Cms) 21.6 x 14 x 1.3
Subject

Contemporary Fiction

भारत विभाजन की त्रासदी पर आधारित डॉ. विष्णुदेव शर्मा द्वारा लिखित उपन्यास सावरीन शबरी विस्थापित हिन्दू और मुसलमान परिवारों की हृदयस्पर्शी गाथाओं का संकलन है। अपनी अल्पकालीन महत्वाकांक्षाओं के लिए कुछ चतुर व कुटिल लोग समाज के पारस्परिक सौहार्द के ताने-बाने को छिन-भिन्न कर पूरे देश को एक अविस्मृत त्रासदी में धकेल देते हैं। सकारात्मक चिन्तन व स्वावलंबन का सहारा लेकर मनुष्य किस प्रकार पुनः अपने को स्थापित कर सकता है, किस प्रकार दलित, अशिक्षित, स्थान भ्रष्ट, साधनहीन नर-नारी भी इस भूले-भटके समाज के मार्गदर्शक बन सकते हैं, भीड़ तन्त्र किस प्रकार किसी गधे को भी घोड़ा बता सकता है, आदि प्रश्नों के उत्तर इस उपन्यास में स्थापित दिखायी देते हैं। महात्मा गांधी का जीवनदर्शन (सर्वधर्म समभाव, हिन्दू-मुस्लिम ऐक्यभाव, दलितोत्थान, नारी सम्मान संरक्षण, खादी प्रयोग, रामराज्य की कल्पना) का संदेश देने में लेखक पूर्ण समर्थ दिखायी देता है। उपन्यास की कथावस्तु पाठक को उत्सुकता में बांधे रखती है। चरित्र-चित्रण, कथोपकथन, उद्देश्य की दृष्टि से उपन्यास अपने में पूर्ण है। डॉ. शर्मा का नारी जगत को ससम्मान समर्पित यह उपन्यास हिन्दी साहित्य व कलामंच के लिए एक अनुपम भेंट है।

Dr. Vishnudev Sharma

डॉ. विष्णु देव शर्मा जन्म : 15 दिसम्बर, 1938 शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी, संस्कृत), पीएच.डी. कार्य : अध्यापन, पूर्व प्रधानाचार्य श्रीरामकृष्ण संस्कृत महाविद्यालय, आगरा (उ.प्र.) संस्थापक : श्रीरामकृष्ण इण्टर कॉलेज, खंदारी, आगरा (उ.प्र.) श्रीनारायणी कन्या इण्टर कॉलेज, सिकन्दरा, आगरा (उ.प्र.) रुचि : लेखन व अध्ययन पता : सुशीला सदन, 2/13 ए, स्वदेशी बीमा नगर, आगरा दूरभाष 0562-2522364 कृतियाँ: दिव्य-घट, बैठा भगवान, पार जाना है मुझे, बाल काव्यांजलि, गीता दोहा कृष्णामृतम्
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