| Publisher |
Rajkamal Prakashan |
| Publication Year |
2020 |
| ISBN-13 |
9789389577488 |
| ISBN-10 |
9789389577488 |
| Binding |
Hardcover |
| Number of Pages |
80 Pages |
| Language |
(Hindi) |
| Dimensions (Cms) |
20 x 14 x 4 |
| Weight (grms) |
220 |
| Subject |
Plays |
दो पात्रों का यह नाटक एक लेखक के रहस्यमय जीवन और लेखन से एक-एक कर कई पर्दे उठाता है। गडग़ड़ सूफी एक जासूस है, जो उसके चर्चित-पुरस्कृत उपन्यासों की सच्चाई की तस्दीक अखबारी कतरनों से करता चलता है और एक दिन आकर लेखक को बताता है कि मुझे मालूम है कि आपने जो भी हत्या-कथाएँ लिखी हैं, वे आपने स्वयं की हैं; और लेखक उसके इस आरोप को स्वीकार कर लेता है और कहता है कि हाँ, वे सब हत्याएँ मैंने ही की हैं। इससे पहले कि जासूस लेखक से कुछ हासिल करने के लिए अपनी शर्तें मनवाता लेखक पिस्तौल के इशारे पर उसे बाल्कनी से गिरकर मरने पर बाध्य कर देता है। तुर्की-ब-तुर्की संवादों के माध्यम से आगे बढ़ता यह छोटा-सा नाटक दर्शक के सामने सच और झूठ का एक तिलस्म रचता है जिसमें हमें यथार्थ का एक नया चेहरा दिखाई देता है।
Piyush Mishra
परिचय मुमकिन नहीं, न ही उन्हें पसन्द है। दोस्तों में ‘पीयूष भाई’ छात्रों में ‘सर’। 1983 से 2003 तक दिल्ली में थियेटर किया। आजकल मुम्बई सिनेमा नगरी में व्यस्त हैं, इस उम्मीद के साथ कि बदलाव वहाँ भी होगा। अब तक प्रकाशित कृतियाँ हैं: जब शहर हमारा सोता है, गगन दमामा बाज्यो, वो अब भी पुकारता है (नाटक), कुछ इश्$क किया कुछ काम किया (शायरी और कविता-संग्रह), तुम मेरी जान हो रजि़या बी (कविता-संग्रह), मेरे मंच की सरगम (थियेटर के गीत), आरम्भ है प्रचण्ड (गीत)।
Piyush Mishra
Rajkamal Prakashan