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Sau Utkrisht Aavishkaron Ki Rochak Gatha

Author :

Ashok Jahnavi Prasad

,

Savita Rani Singh

Publisher:

VANI PRAKSHAN

Rs556 Rs695 20% OFF

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Publisher

VANI PRAKSHAN

Publication Year 2026
ISBN-13

9789373488110

ISBN-10 9373488112
Binding

Hardcover

Number of Pages 232 Pages
Language (Hindi)
Weight (grms) 400
Subject

Fantasy, Science Fiction & Horror

100 उत्कृष्ट आविष्कारों की रोचक गाथा यह पुस्तक दैनिक जीवन में नित्य उपयोग में आने वाले उपकरणों के जन्म की गाथा है, क्योंकि हम इनसे न ही परिचित हैं और न ही इन्हें जानने की आवश्यकता समझते हैं, जबकि हर यन्त्र अपने विकास की रोमांचक गाथा अपने में समेटे है। हमारी ज़िन्दगी को सरल और आसान बनाने की इच्छा से प्रेरित होकर ये आविष्कार किये गये हैं। ये हमें गति भी प्रदान करते हैं। मूलभूत आवश्यकता रोटी, कपड़ा और मकान इन तीनों क्षेत्र में आविष्कारों ने क्रान्तिकारी परिवर्तन किया है। एक वो समय था जब हमारे घर की महिलाएँ सूर्योदय से सूर्यास्त तक केवल भोजन कार्य में ही संलग्न रहती थीं, परन्तु आज ऐसे-ऐसे उपकरण हमारे पास हैं, जो अल्पसमय में ही भाँति- भाँति के स्वादिष्ट व्यंजन बनाने और परोसने का सामर्थ्य रखते हैं, जिस कारण घर बाहर की ज़िम्मेदारियाँ निभाना सरल हो गया, आधी आबादी कन्धे से कन्धा मिला चल सकी। कपड़ा मिलों ने आम जन को वस्त्र सर्व सुलभ करा दिया। समय के विस्तार के साथ सुरक्षा के भी अनेक साधन मिल गये। आज खेल का मैदान भी नये- नये मनोरंजक खेलों को समेट रखा है। विभिन्न सरलीकरण के साथ-साथ लागत पर भी खोजियों ने ध्यान दिया। समस्त आविष्कारों को एक स्थान पर समेटना कठिन था अतः मात्र सौ को ही यहाँ लिपिबद्ध किया गया है। सृजन के पूर्व की व्यथा और सृजन के बाद के सुख का अनुभव आपको यहाँ मिलेगा। दो तथ्यों ने लेखक द्वय को इस पुस्तक के लिए प्रेरित किया— प्रथम उन नवप्रवर्तकों को सम्मान देना तथा उनके उत्साह और जुनून को दर्शाना जिनके हम बहुत ऋणी हैं। द्वितीय असीम उत्साहपुंज, नवोन्मेषी भावनाओं से ओतप्रोत हमारी युवा पीढ़ी, आविष्कारों के पूर्व हुए उल्लेखनीय प्रयास और परिणाम के बाद के सुकून से प्रेरणा लेकर अपना नाम भी स्वर्णाक्षरों में दर्ज करा लें।

Ashok Jahnavi Prasad

अशोक जाह्नवी प्रसाद अशोक जाह्नवी प्रसाद पूरी दुनिया के दस से अधिक देशों के सर्वोत्कृष्ट विश्वविद्यालयों में एक शिक्षक, शोधार्थी, लेखक, चिकित्सक, दार्शनिक और बहुविज्ञ के रूप में, तीस साल से अधिक समय तक शानदार रूप से कार्यरत रहे। पाँच अलग-अलग विषयों में पीएच.डी. करने के उपरान्त तो इन्हें मानक डॉक्टरेट उपाधि और फेलोशिप प्रदान करने में संस्थान भी स्वयं को गौरवान्वित महसूस करने लगे, फलस्वरूप इसकी लड़ी लग गयी। आप देश ही नहीं विश्व के अनेक नामचीन संगठनों के सदस्य भी रहे हैं, जैसे ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ एडवांस्डस्टडी’ के गवर्निंग समूह के सदस्य रहे हैं, जो मानविकी का सर्वोच्च निकाय है साथ ही ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेस, गोरखपुर के गवर्नर्स में से एक है। वक़ास अहमद रचित हाल ही में जारी सर्वाधिक बिकने वाली पुस्तक ‘The Polymath’ में इन्हें ‘Most educated person on the planet’ के रूप में चिन्हित किया है। सच है, मेडिकल प्रैक्टिशनर डॉक्टर ने एलएलएम भी किया है, दर्शन की बात भी करता है, विज्ञान के इतिहास पर प्रकाश भी डालता है, विज्ञान के प्रमुख वैज्ञानिकों की जन्मतिथि पर उनके काम का विवरण फेसबुक पर लिखता है, गणित और भौतिकी पर वार्ता करता है, तो निश्चित ही वह विश्व की विशिष्ट विद्वत्ता को अपनी मुट्ठी में रखता है। ****** सविता रानी सिंह गोरखपुर में जन्मी सविता रानी सिंह अपनी प्रारम्भिक शिक्षा के उपरान्त आईटी (वर्तमान में आईआईटी), बीएचयू, वाराणसी से पीएच.डी. की उपाधि लेकर, बनस्थली विद्यापीठ, राजस्थान, के इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग, आरईसी (वर्तमान में एनआईटी) सिल्वर, असम के भौतिक विभाग, मदन मोहन मालवीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भाटपार रानी देवरिया के भौतिक विभाग में शिक्षण कार्य करते हुए, अन्ततोगत्वा गृहस्थान गोरखपुर में महात्मा गांधी पी जी कॉलेज के भौतिक इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्प्यूटर विभाग के अध्यक्ष पद से अवकाश प्राप्त किया। इस बीच विज्ञान के विकास को समाज में लोकप्रिय बनाने हेतु, कई परियोजनाओं जैसे डीएसटी की ‘Inspire Internship Program’ को कई बार समन्वित किया। सभाओं तथा व्याख्यानों द्वारा अभी भी छात्रों को विज्ञान में रुचि उत्पन्न कराती हैं, और पुस्तकों के इतर व्यावहारिक विज्ञान की भाषा समझाती हैं।

Savita Rani Singh

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