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FYODOR DOSTOYEVSKY
फ़्योदोर मिखाइलोविच दोस्तोयेव्स्की
फ़्योदोर मिखाइलोविच दोस्तोयेव्स्की का जन्म 11 नवंबर 1821 को मॉस्को में हुआ। उनके पिता एक सैन्य अस्पताल में चिकित्सक थे। माँ एक धार्मिक महिला थीं। पिता की इच्छा पर उन्होंने सेंट पीटर्सबर्ग के सैन्य अभियंत्रण विद्यालय में प्रवेश लिया, पर यह जीवन उन्हें रास नहीं आया। गणित और इंजीनियरिंग से अधिक वह साहित्य, संगीत और मानवीय चरित्रों में रुचि रखते थे। 1846 में उनका पहला उपन्यास ‘ग़रीब लोग (Poor Folk)’ प्रकाशित हुआ, जिसे प्रसिद्ध आलोचक बेलिन्स्की ने ख़ूब सराहा। इससे वह अचानक साहित्यिक जगत में चर्चित हो गए। शीघ्र ही वह प्रगतिशील और समाजवादी विचारों से प्रभावित हुए और पेत्राशेव्स्की मंडल से जुड़ गए। इस कारण 1849 में उन्हें गिरफ़्तार कर राजद्रोह का दोषी ठहराया गया और मृत्युदंड की सज़ा सुनाई गई। जब उन्हें गोली मारने के लिए मैदान में खड़ा किया गया—आँखों पर पट्टी बाँध दी गई— ठीक अंतिम क्षण में दंड को आजीवन कठोर कारावास में बदल दिया गया और उनको साइबेरिया निर्वासित कर दिया गया।
निर्वासन से लौटने के बाद उनका जीवन आर्थिक संकट, बीमारी और जुए की लत से घिरा रहा। वह क़र्ज़ चुकाने के लिए लगातार लिखते रहे। इसी दौर में ‘व्हाइट नाइट्स’ (1848), ‘अपराध और दंड’ (1866), ‘इडियट ‘(1869), ‘डेमन्स’ (1872) और अंततः ‘ब्रदर्स करामाज़ोव’ (1880) जैसे महान कृतियाँ रची गईं।
उनकी भाषा-शैली मनोवैज्ञानिक, संवादप्रधान और अंतर्मुखी है, जिसमें आत्मालाप और नैतिक तनाव प्रमुखता से उभरकर सामने आते हैं।
व्हाइट नाइट्स उनकी रचनाओं में विशिष्ट स्थान रखती है। यह एक कोमल, स्वप्निल और आत्मकथात्मक कहानी है, जिसमें महान त्रासदियों के बजाय क्षणिक प्रेम, अकेलेपन और अधूरी आकांक्षा की मार्मिक अभिव्यक्ति मिलती है।
9 फ़रवरी 1881 को सेंट पीटर्सबर्ग में उनका निधन हुआ। आज दोस्तोयेव्स्की को आधुनिक उपन्यास और मनोवैज्ञानिक साहित्य का एक मज़बूत स्तंभ माना जाता है। एक ऐसा लेखक जिसने मनुष्य की अंतरात्मा को कथा का केंद्र बना दिया।
FYODOR DOSTOYEVSKY
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