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| Publisher | Q FORD |
| Publication Year | 2015 |
| ISBN-13 | 9788190592413 |
| ISBN-10 | 8190592416 |
| Binding | Paperback |
| Number of Pages | 132 Pages |
| Language | (Hindi) |
| Dimensions (Cms) | 20 x 14 x 4 |
| Weight (grms) | 170 |
| Subject | Literature & Fiction |
चौथी किस्म उन लोगों की है जो अमीर बनना ही नहीं चाहते। सच्चाई को देखकर भी वे अनदेखा कर देते हैं, वे जहां पर भी हैं अपनी स्थिति से संतुष्ट हैं, वे रुखी-सूखी खा कर ठण्डा पानी पीने में मग्न हैं तथा रूमाल को चादर समझकर ओढ़ने की प्रवीणता को हासिल कर चुके हैं। ईश्वर भी अगर चाहे तो उनका भला नहीं कर सकता फिर आप किस खेत की मूली हैं ? यदि आप अमीर बनना चाहते हैं तो जरूरी नहीं कि इसके लिए दरिद्रता का अध्ययन किया जाए। यह विपरीत दिशा में कार्य करते हुए सपना साकार होने की प्रतीक्षा करने के समान है। बीमारियों का अध्ययन करके हम आरोग्य को खोजने का प्रयास करते हैं, पाप का अध्ययन करके हम पुण्य सीखने का प्रयास करते हैं। ठीक इसी प्रकार निर्धनता का अध्ययन करके हमें समृद्धि कैसे हाथ लगेगी? औषधियों ने स्वास्थ्य के स्थान पर आज तक बीमारियाँ ही जन्मी हैं, धर्म का दर्शन भी पुण्य करने के लिए प्रोत्साहित न करके हमें पाप करने से ही रोकता है तथा अर्थशास्त्र ने आज तक गरीबों एवं जरूरतमंदों को ही जन्म दिया है, न कि अमीरों को।
Wallace Delois Wattles
Q FORD