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| Publisher | Manjul Publishing House Pvt. Ltd. |
| Publication Year | 2026 |
| ISBN-13 | 9789373171524 |
| ISBN-10 | 9373171526 |
| Binding | Paperback |
| Number of Pages | 400 Pages |
| Language | (Hindi) |
| Dimensions (Cms) | 21 x 14 x 2.5 |
| Subject | Mythology |
आपके लिए रामायण क्या है? केवल धर्मशास्त्र या आध्यात्मिक साधना की एक पुस्तक? या एक अंतहीन विवेक और आनंद का स्रोत? या फिर एक साथ सबकुछ? रामायण ने एशिया भर में सदियों और सहस्राब्दियों से अपनी यात्रा में अनगिनत पीढ़ियों को प्रभावित किया है, जिसमें मौखिक परंपरा, प्राचीन पांडुलिपियाँ और आधुनिक ग्रंथ शामिल हैं। क्या आप जानते हैं कि इस महाकाव्य से निकली कई लोककथाओं में रावण की बहन शूर्पणखा को एक हमलावर के बजाय प्रेमिका के रूप में चित्रित किया गया है? या यह कि थाई और तिब्बती संस्करणों में सीता को रावण की पुत्री के रूप में पहचाना गया है, जबकि मध्य एशिया की ‘खोतानी रामायण’ में वह राम और लक्ष्मण, दोनों से विवाह करती हैं? इस पुस्तक में आनंद नीलकंठन कहानियों और टिप्पणियों के माध्यम से यह तलाश करते हैं कि वाल्मीकि ने अपनी मूल कथा में क्या संदेश देना चाहा होगा और कैसे इस महाकाव्य ने हज़ारों वर्षों की अपनी यात्रा में अपने कई ऐसे रूप धारण किए, जो कल्पना से परे हैं। वह हमें इस महाकाव्य की गहराई में उतरने, इसकी जटिलता को समझने और उन संस्करणों को खोजने के लिए आमंत्रित करते हैं, जो हमारे भीतर सबसे अधिक गूँजते रहते हैं। अंततः रामायण केवल एक कहानी भर नहीं है, जो बस एक सत्य दर्शाती हो—यह तो बहुलता और विवेक का एक अमिट प्रतीक और कई सत्यों का संगम है।
Anand Neelakantan
Manjul Publishing House Pvt. Ltd.