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| Publisher | AMAR CHITRA KATHA PVT. LTD. |
| ISBN-13 | 9788184823592 |
| ISBN-10 | 8184823592 |
| Binding | Paperback |
| Number of Pages | 32 Pages |
| Language | (Hindi) |
| Weight (grms) | 100 |
कुंभकर्ण को शरारतों से दूर रखने का एकमात्र उपाय उसे चौबीसों घंटे सुलाए रखना था! हाथियों की चिंघाड़ और रौंदने की आवाज, ढोल की कर्कश आवाज और पत्थरों की बारिश भी इस विशालकाय राक्षस को जगा नहीं पाती थी। लेकिन जैसे ही उसे ताज़ा खाना पकने की खुशबू आती, वह तुरंत उठ खड़ा होता! हालांकि, अयोध्या के परम योद्धा राम घात लगाए बैठे थे।
Amar Chitra Katha
AMAR CHITRA KATHA PVT. LTD.