Apar Khushi Ka Gharana (Pb)

Author:

Arundhati Roy

,

Mangalesh Dabral

Publisher:

Rajkamal Parkashan Pvt Ltd

Rs311 Rs399 22% OFF

Availability: Available

Publisher

Rajkamal Parkashan Pvt Ltd

Publication Year 2019
ISBN-13

9789388753586

ISBN-10 9388753585
Binding

Paper Back

Number of Pages 432 Pages
Language (Hindi)
Dimensions (Cms) 20 x 14 x 4
Weight (grms) 470
अपार ख़ुशी का घराना’ हमें कई वर्षों की यात्रा पर ले जाता है. यह एक ऐसी कहानी है जो वर्षों पुरानी दिल्ली की तंग बस्तियों से खुलती हुई फलते-फूलते नए महानगर और उससे दूर कश्मीर की वादियों और मध्य भारत के जंगलों तक जा पहुँचती है, जहां युद्ध ही शान्ति है और शान्ति ही युद्ध है., और जहां बीच-बीच में हालात सामान्य होने का एलान होता रहता है. अंजुम, जो पहले आफ़ताब थी, शहर के एक क़ब्रिस्तान में अपना तार-तार कालीन बिछाती है और उसे अपना घर कहती है. एक आधी रात को फुटपाथ पर कूड़े के हिंडोले में अचानक एक बच्ची प्रकट होती है. रहस्मय एस. तिलोत्तमा उससे प्रेम करनेवाले तीन पुरुषों के जीवन में जितनी उपस्थित है उतनी ही अनुपस्थित रहती है. ‘अपार ख़ुशी का घराना’ एक साथ दुखती हुई प्रेम-कथा और असंदिग्ध प्रतिरोध की अभिव्यक्ति है. उसे फुसफुसाहटों में, चीख़ों में, आँसुओं के ज़रिये और कभी-कभी हँसी-मज़ाक़ के साथ कहा गया है. उसके नायक वे लोग हैं जिन्हें उस दुनिया ने तोड़ डाला है जिसमें वे रहते हैं और फिर प्रेम और उम्मीद के बल पर बचे हुए रहते हैं. इसी वजह से वे जितने इस्पाती हैं उतने ही भंगुर भी, और वे कभी आत्म-समर्पण नहीं करते. यह सम्मोहक, शानदार किताब नए अंदाज़ में फिर से बताती है कि एक उपन्यास क्या कर सकता है और क्या हो सकता है. अरुंधति रॉय की कहानी-कला का करिश्मा इसके हर पन्ने पर दर्ज है.

Arundhati Roy

Arundhati Roy is the author of The God of Small Things, which won the Booker Prize in 1997 and was a bestseller in more than thirty languages worldwide.

Since then Roy has published five books of influential non-fiction essays that include The Algebra of Infinite Justice (2001), Listening to Grasshoppers (2009), and Broken Republic (2011). She has raised profound questions about war and peace, the definitions of “violence” and “non-violence”, about what we think of as “development”, “democracy”, “nationalism”, “patriotism” and indeed the idea of civilization itself.

Roy is a trained architect. She lives in New Delhi.

Mangalesh Dabral

मंगलेश डबराल हिन्दी के कवि, पत्रकार और अनुवादक हैं। आपकी कविता के 10 संग्रह और संचयन, जिनमें दो अंग्रेज़ी अनुवाद हैं ; दो यात्रा-संस्मरण और दो समीक्षात्मक गद्य की पुस्तकें प्रकाशित हैं। आपकी कविताएँ प्रमुख भारतीय और विदेशी भाषाओं में प्रकाशित हुई हैं और आपने कई राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय कविता समारोहों में शिरकत की है। कई पुरस्कारों से सम्मानित मंगलेश राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में स्वतंत्र लेखन करते हैं।
More from Author