| Publisher |
HIND YUGM |
| Publication Year |
2023 |
| ISBN-13 |
9789392820809 |
| ISBN-10 |
9392820801 |
| Binding |
Paperback |
| Edition |
1st |
| Number of Pages |
136 Pages |
| Language |
(Hindi) |
पिछले चार दशकों से कविता लिखते हुए तथा उम्र के उस पड़ाव पर पहुँचे हुए जिसमें अधिकांश कवि-लेखक अपनी पिछली कमाई की जुगाली करते नज़र आते हैं, विनोद कुमार शुक्ल अपनी सृजनशीलता से इस नए संग्रह में भी हमें अवाक् और हतप्रभ कर देते हैं। कुछ मतिमंद जो उन पर भाषाई खिलवाड़, चमत्कार, वक्रोक्ति, उलटबाँसी, शिल्पातिरेक या कलावादिता का आरोप लगाते हैं वे ज़रा इस संग्रह की हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था और तथा जैसी कविताएँ देखें जिनमें कवि की अपनी शैली की सारी ज़िदों का निर्वाह भी हुआ है और भारतीय समाज तथा मानवमात्र को लेकर पूरी सहानुभूति, करुणा और प्रतिबद्धता भी असंदिग्ध रूप से उजागर हैं। यह विनोद कुमार शुक्ल ही कह सकते हैं कि आदमी को जानना ज़रूरी नहीं है, उसकी हताशा को और उसके साथ चलने को जानना बहुत है। जो यह कहते हैं कि कवि हमारे यथार्थ का कोमलीकरण करता है वे देखें कि उसके कान दुकानदार द्वारा राशन लेनेवालों को धीरे से दी गई माँ-बहन की गाली सुन सकते हैं और फिर उसकी आँखें उस गाली से जन्मे उस लड़के को भी देख सकती हैं जो जुलूसवालों को ठीक वही गाली देता है।
Vinod Kumar Shukla
Born: January 1, 1937 जन्म : 1 जनवरी, 1937 को राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़) में। सृजन : पहला कविता संग्रह 1971 में लगभग जयहिन्द (पहल सीरीज़ के अन्तर्गत), वह आदमी चला गया नया गरम कोट पहनकर विचार की तरह (1981), सब कुछ होना बचा रहेगा (1992), अतिरिक्त नहीं (2000), कविता से लम्बी कविता (2001), कभी के बाद अभी (सभी कविता-संग्रह); 1988 में पेड़ पर कमरा (पूर्वग्रह सीरीज़ के अन्तर्गत) तथा 1996 में महाविद्यालय (कहानी संग्रह); नौकर की कमीज़ (1979), दीवार में एक खिड़की रहती थी, खिलेगा तो देखेंगे, हरी घास की छप्पर वाली झोपड़ी और बौना पहाड़ (सभी उपन्यास)।
मेरियोला आफ्रीदी द्वारा इतालवी में अनुवादित एक कविता-पुस्तक का इटली में प्रकाशन, इतालवी में ही पेड़ पर कमरा का भी अनुवाद। इसके अलावा कुछ रचनाओं का मराठी, मलयालम, अंग्रेज़ी तथा जर्मन भाषाओं में अनुवाद।
Vinod Kumar Shukla
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