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| Publisher | Rajkamal Prakashan |
| Publication Year | 2006 |
| ISBN-13 | 9788126701346 |
| ISBN-10 | 812670134X |
| Binding | Hardcover |
| Number of Pages | 335 Pages |
| Language | (Hindi) |
| Dimensions (Cms) | 20 x 14 x 4 |
| Weight (grms) | 520 |
| Subject | Indian History |
चारु चन्द्रलेख चारु चन्द्रलेख आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी की कलम से निकली हुई एक गहरी संवेद्य कृति है। इसमें 12वीं-13वीं सदी के भारत का व्यक्ति और समाज बहुत बारीकी से व्यक्त हुआ है। समय के उस दौर में देश के लिए विदेशी आक्रमण का प्रतिरोध एक बड़ी चुनौती का दायित्व था लेकिन देश की समूची अध्यात्मिक तथा इतर शक्तियाँपुरातन अंधविश्वास के रास्ते नष्ट हो रहीं थीं। ऐसे में समाज के पुनर्गठन का काम पूरी तरह से उपेक्षित था और नए मूल्यों के सृजन की ज़रूरत की अनदेखी हो रही थी। हजारीप्रसाद द्विवेदी का यह उपन्यास उस युग की जड़ता तोड़ने के बहाने काल निरपेक्ष रूप से देश में नए उत्साह का संचार करता है। रचना का यही बल इसे कालजयी बनाता है। एक गाम्भीर्य पूर्ण दायित्व को निभाते हुए चारू चन्द्रलेख एक बेहद रोचक वृत्तान्त भी है और इसीलिए इसकी प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। आज भी इसकी ललकार को अनसुना कर पाना सम्भव नहीं है।
Hazari Prasad Dwivedi
Rajkamal Prakashan