| Publisher |
Vani Prakashan |
| Publication Year |
2014 |
| ISBN-13 |
9789350009697 |
| ISBN-10 |
9350009692 |
| Binding |
Hardcover |
| Number of Pages |
168 Pages |
| Language |
(Hindi) |
| Weight (grms) |
400 |
| Subject |
Comics, Mangas & Graphic Novels |
गौतम बुद्ध के उपदेशों और कबीर एवं मीरा के पद्यांशों का सहारा लेकर ए. हमीद ने इस उपन्यास में मानव-मन की अनेक परतें खोली हैं। पाकिस्तान में रहते हुए भी उपन्यासकार ने भारतीय संस्कृति के उस रूप को उजागर किया है, जो हमें धार्मिकता नहीं इन्सानियत का पाठ पढ़ाता है। मूल रूप में रूमानी होते हुए भी यह उपन्यास अपने कथानक के माध्यम से अध्यात्म के कई गवाक्ष खोलता है और अपने पाठक की सोच को संकीर्णता से मुक्त करने का प्रयास करता है।
A. Hameed
ए. हमीद - ए. हमीद का जन्म 1928 में अमृतसर में हुआ। उन्होंने दसवीं की शिक्षा अमृतसर से उत्तीर्ण की और विभाजन के बाद पाकिस्तान चले गये। वहीं से इंटरमीडिएट करने के बाद रेडियो पाकिस्तान में सहायक स्क्रिप्ट एडिटर नियुक्त हुए रेडियो पाकिस्तान में कुछ वर्ष कार्य करने के पश्चात उन्होंने बॉयस ऑफ़ अमेरिका में भी कार्य किया। ए. हमीद के पहले कहानी संग्रह 'मंजिल महिला' ने पाठकों के बीच ख्याति अर्जित की और रोमांटिक कहानी लेखक के रूप में उन्होंने प्रसिद्धि पायी। ए. हमीद ने दो सौ से अधिक पुस्तकें लिखी है। उनकी चर्चित पुस्तकों में 'उर्दू शेर की दास्ता', 'उर्दूनम की दास्ता', 'मिर्ज़ा ग़ालिब दास्तांगो अशफ़ाक अहमद' इत्यादि रही है। उनका 'डामा ऐनक पाला जिन' बच्चों के बीच काफ़ी लोकप्रिय रहा है। 29 अप्रैल, 2011 को 83 वर्ष की अवस्था में देहावसान।
A. Hameed
Vani Prakashan