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Dheere Dheere Bastar

Author :

Rakesh Kumar Singh

Publisher:

HIND YUGM

Rs269 Rs299 10% OFF

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Publisher

HIND YUGM

Publication Year 2026
ISBN-13

9788169516150

ISBN-10 8169516153
Binding

Paperback

Number of Pages 256 Pages
Language (Hindi)
Weight (grms) 214
Subject

Travel Writing

थ्योरी को प्रैक्टिस से जोड़कर ही सामाजिक ज्ञान बनता है। फ़्रांसीसी इतिहासकार मार्क ब्लोच ने ठीक लिखा है : समाजशास्त्री को मज़बूत जूते पहनने चाहिए। राकेश ने इसमें छत्री, साइकिल और टेंट भी जोड़ दिया है और हमारे सामने बस्तर की नायाब असलियत पेश की है। राकेश ने ज़िंदगी को जीने की एक ऐसी राह चुनी है जिससे कई लोगों को रश्क होता है। दूसरी तरफ़ आज के इस ग्लेमर-शुदा समाज में शायद चंद लोग इन्हें दीवाना ही मानें। बहरहाल, ये आत्मीय किताब एक जुनून का नतीजा नहीं तो और क्या है? हिंदुस्तान ऐसे दीवानों का मुश्ताक़ है। तारीख़ गवाह है कि कई मुल्कों में कुछ कर गुज़रने वाले दरवेश ही होते हैं। अगर डॉ. चे ग्वेरा मोटरसाइकिल पर दक्षिण अमेरिका के गाँवों, पहाड़ों और जंगलों की सैर नहीं करते तो कायनात एक क्रांतिकारी से महरूम रह जाती। राकेश भी हिंदुस्तानी परिवेश में किसी क्रांतिकारी से कम नहीं हैं। साइकिल से 28000 किलोमीटर के देश भ्रमण का नतीजा ये बेहतरीन पुस्तक है। किताब बस्तर के अद्भुत सौंदर्य और वहाँ के लोगों के नैसर्गिक लोकतांत्रिक जीवन की बेमिसाल तस्वीर है। बस्तर में एक नज़दीकी और मासूमियत है जिसका ये सहज साहित्यिक वर्णन हमारे दिल को ख़ुशी और उम्मीद से भर देता है।

Rakesh Kumar Singh

काम और जज़्बात के बीच हिलकोरे मारता एक लापरवाह, अल्‍हड़ और अराजक टहलबाज़। सराय-सीएसडीएस के साथ मीडिया, शहर, बाज़ार और श्रम पर की गई माथापच्‍ची और ‘मीडियानगर’ शृंखला के संपादन में इसने आठ-दस बरस खपाए। कुछ समय वनाधिकारों के मसले पर ‘फेयाड़ा’ और शहरी बेघरी पर ‘हमशहरी’ की एडिटरी में भी। धंधेबाज़ी के अंतिम 17 महीने कॉर्पोरेट कम्‍युनिकेशन्‍स, मीडिया मैनेजमेंट और पीआरगीरी में। लिखने-उखने का फितूर। 'बम संकर टन गनेस’ उसी का बाईप्रोडक्‍ट। जेंडर बायस्‍ड भ्रूण हत्‍याओं, रेप्‍स और तेज़ाब हमलों वाले भारतवर्ष का जेंडर-चिंतन और इसकी निर्मिति से जुड़ा जोड़ा भर सवाल लादे उन्‍नीस-बीस महीनों से Ride for gender freedom पर।
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