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Dhanika । धनिका

Author :

Madhu Chaturvedi

Publisher:

HIND YUGM

Rs135 Rs150 10% OFF

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Publisher

HIND YUGM

Publication Year 2021
ISBN-13

9788194844327

ISBN-10 8194844320
Binding

Paperback

Edition 2nd
Number of Pages 159 Pages
Language (Hindi)
Subject

Comics, Mangas & Graphic Novels

बच्चे को जन्म देते समय 206 हड्डियों के टूटने का दर्द सह लेने वाली औरत एक नाजुक ख्याल दरकने की पीड़ा क्यों बर्दाश्त नहीं कर पाती है? क्या रिश्ते निभाने का अर्थ रूहानी न होकर उम्मीदों और दुनियादारी की जिम्मेदारी का सही गणितीय संतुलन है? ऐसे आदिम सवालों के जवाब तलाशने धनिका, प्रेमा, अर्चना, -संजय और वासु के जीवन सफर पर चलिए ‘धनिका’ के साथ। ‘धनिका’ कहानी उन रिश्तों की जो रह-रहकर पिछले 17 साल से मेरे जेहन में ख़दबद मचाए थे। उन चेहरों की जिन्हें मैं आखिरी साँस तक नहीं भूल सकती। उन त्रासदियाँ की जिनकी नमी पलकों से आजीवन विदा नहीं ले सकती। उन्हें सांत्वना देने, दुलार भर थपकने की कोशिश है—धनिका। दो साल पहले जब इसे लिखना शुरू किया था तो आधी-आधी रात तक बरसों पहले गुजर चुके वे आत्मीय पल, वो हृदय विदारक हादसे, वो बिछड़े हुए लोग, वो मधुर मुलाकातें सबने सिलसिलेवार हो धीरे-धीरे एक उपन्यास का रूप ले लिया। सोचा नहीं था कि इन चरित्रों को विदा कर आपको सौंपते समय मन इतना लबालब हो जाएगा। हर चरित्र की अपनी मजबूरी। कौन सही, कौन गलत का निर्णय आप पर छोड़ा। अनगिनत काबिल लेखकों और असंख्य उम्दा किताबों के बीच इस उपन्यास की क्या महत्ता मुझे नहीं मालूम। अब समय है ‘धनिका’ संग आपके शरीक होने का ‘तिवारी-सदन’ के आँगन की मध्यमवर्गीय पारिवारिक चर्चाओं में, शिवनाथ घाट किनारे दो युवा मन के बीच दुनिया से छिपकर किए उन वादों को सुनने का जिन पर हालात की गाज गिरने के बाद कोई मोल न बचा। मंझधार में छूटे लोगों के संघर्ष और सफर को देखने का। डूबते हुए लोगों के तट पर पहुँच जाने के बाद की थकान को अपनी धमनियों में महसूस करने का। धनिका गूँज है हर इंसान के भीतर सहेजे खालीपन की। आपको बस उसी तरह सौंप रही हूँ जैसे कार्तिक की सर्द सुबह घाट किनारे बैठकर छोड़ देते है वो बहती धार में जलता दीपक महज इस आस के साथ की मेरी आवाज़ पहुँचेगी वहाँ जहाँ इसे सुनने प्रतीक्षा की जा रही है।.

Madhu Chaturvedi

मधु चतुर्वेदी एक गृहणी हैं और अपना रोज़नामचा अपने फ़ेसबुक पेज ‘Madhu’ पर लिखती हैं, जहाँ इन्हें 65 हज़ार से अधिक पाठक फॉलो करते हैं। मधु हिंदी में लिख रहीं समकालीन युवा स्त्री लेखिकाओं में सर्वाधिक लोकप्रिय हैं। मधु के लेखन में स्त्री जीवन की समकालीन दुनिया मुखर रूप में उपस्थित है। यह इनकी पहली किताब है।
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