| Publisher |
HIND YUGM |
| Publication Year |
2022 |
| ISBN-13 |
9789392820236 |
| ISBN-10 |
9392820232 |
| Binding |
Paperback |
| Edition |
1st |
| Number of Pages |
160 Pages |
| Language |
(Hindi) |
| Subject |
Poetry |
‘धूप, चाँदनी और स्याह रंग’ एक अनूठा कविता-संग्रह है जिसमें अलग-अलग विषयों पर लिखी गई कविताएँ मूलतः अपने परिवेश में स्वयं की सार्थकता की तलाश करती हैं। कविताओं में भी कहानी होती है। शब्दों और वाक्यों के पीछे से चुपचाप झाँकती कई-कई कहानियाँ जो आहिस्ता-आहिस्ता खुलती-निखरती जाती हैं। ‘धूप, चाँदनी और स्याह रंग’ में कई ऐसी कविताएँ संकलित हैं जो ऐसी ही विशिष्ट अनुभूति देती है। ‘‘पक्षियों के भटकाव में है पेड़ का गिरना फिर-फिर उजड़ना फिर-फिर बसना उजड़ती ज़िंदगी का दर्द भी रहता है क्या महफ़ूज़ कहीं
किसी क्लाउड पर अपलोड होकर!” -इसी संग्रह से
Sunil Jha
सुनील झा मूलतः बिहार के मधुबनी ज़िले से हैं। अधिकांश शिक्षा-दीक्षा सीतामढ़ी, मुज़फ़्फ़रपुर और दरभंगा जैसे बिहार के ही छोटे शहरों में हुई। सिविल सर्विसेज़ की तैयारी के लिए ढेर सारे अन्य बिहारियों की तरह ही दिल्ली देखकर आए और वहीं इस कथा का सूत्र मिला। इसके पात्र मिले और इसकी भाव-भूमि मिली।
संप्रति : भारतीय राजस्व सेवा में।
प्रकाशित रचनाएँ : धूप, चाँदनी और स्याह रंग (कविता-संग्रह); ब्लेज़ : एक बेटे की अग्निपरीक्षा (अनुवाद)
Sunil Jha
HIND YUGM