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Gamchha | गमछा

Author :

Mamta Kalia

Publisher:

Unbound Script

Rs234 Rs275 15% OFF

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Publisher

Unbound Script

ISBN-13

9788169235136

ISBN-10 8169235138
Binding

Paperback

Edition 2026
Number of Pages 144 Pages
Language (Hindi)
Subject

Short Stories

ममता कालिया की अनुभवी कलम से निकली ये तेरह नई कहानियाँ समाज और मन की ऐसी छुपी हुई जगहों का आख्यान हैं जिनपर सामान्यतः नज़र नहीं जाती । इन्हें रचते हुए वे अलग- अलग शैलियों, चरित्रों और स्थितियों का बड़े ही सिद्धहस्त तरीके से संधान करती हैं। पढ़ते हुए आप यह महसूस करते हैं कि ये कहानियाँ सहज-पठनीय हैं, अपनी बुनावट में सरल प्रतीत होती हैं लेकिन अपने कथ्य और विषयवस्तु के चयन में, जटिल और बहुस्तरीय हैं। इनकी सूक्ष्मता ज़ाहिर नहीं है, वह पाठक की चेतना में घटित होती है । पारिवारिक सामाजिक ताने-बाने में कुचली जाती स्त्री हो या बदलाव की ऊर्जा से भरे किन्तु दिशाहीन युवा, साहित्यिक आयोजनों का छिछलापन हो या एकाकी पिता का बुढ़ापा; इन कहानियों में ऐसे सभी पात्र, समुदाय और घटनाएँ अपनी मार्मिकता, विडम्बना और हास्यबोध को ऐसे ही साथ लिए चलते हैं जैसे वे हमारी इस दुनिया में मौजूद हैं ।

Mamta Kalia

ममता कालिया हिंदी और अंग्रेजी साहित्य की प्रसिद्ध लेखिका, कवयित्री और उपन्यासकार हैं। उनका जन्म 1940 में वृंदावन, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उन्होंने अपनी शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से प्राप्त की। ममता कालिया का लेखन समाज की सशक्त आलोचना, नारीवाद और भारतीय मध्यमवर्गीय जीवन की यथार्थपरक अभिव्यक्ति के लिए प्रसिद्ध है। उन्होंने कविता, उपन्यास, और निबंध सहित विभिन्न विधाओं में लेखन किया है। उनकी प्रमुख कृतियों में बेघर, नारी समागम, दुखमुक्त, बोलने वाली लड़की और दौड़ शामिल हैं। उनका चर्चित उपन्यास दुक्खम-सुक्खम उनकी विशिष्ट लेखन शैली को दर्शाता है। ममता कालिया को कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है, जिनमें 2017 में उनके उपन्यास दुक्खम-सुक्खम के लिए व्यास सम्मान प्रमुख है। उन्होंने इंदौर के एक महिला कॉलेज में प्राध्यापक और प्रधानाचार्य के रूप में भी सेवाएं दी हैं, जिससे शिक्षा और साहित्य दोनों में उनका योगदान महत्वपूर्ण बना।
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